नयी दिल्ली , मार्च 12 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर की एक विशेष समिति जल्द ही यह तय करेगी कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) विवाद के बाद मिशेल डैनिनो वहां अतिथि प्रोफेसर के रूप में बने रहेंगे या नहीं।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सार्वजनिक संस्थानों को श्री डैनिनो और दो अन्य सहयोगी लेखकों से संबंध नहीं रखने की बात कही थी।

इस विवाद की जड़ एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की वह पाठ्यपुस्तक है, जिसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित एक विवादित अंश शामिल था।

उच्चतम न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र, राज्यों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे उस टीम के सदस्यों से दूरी बनाएं जो इस विवादित अध्याय को तैयार करने के लिए जिम्मेदार थे।

श्री डैनिनो, एनसीईआरटी की उस सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष थे, जिसने कक्षा छह से आठ तक की किताबों की तैयारी की देखरेख की थी। फ्रांस में जन्मे श्री डैनिनो 1977 में भारत आये थे और उन्हें 2017 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। वह 2011 से आईआईटी गांधीनगर से जुड़े हैं और उन्होंने वहां 'पुरातत्व विज्ञान केंद्र' की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नया पाठ्यक्रम ढांचा तैयार करने वाली सरकारी समिति के भी सदस्य रहे हैं।

न्यायालय ने श्री डैनिनो के अलावा दो अन्य लेखकों, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के खिलाफ भी इसी तरह के निर्देश दिये हैं। अब सबकी नजरें आईआईटी गांधीनगर के पैनल पर टिकी हैं कि वह डैनिनो के 14 साल पुराने जुड़ाव को लेकर क्या फैसला करता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित