रायपुर , अगस्त 11 -- छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोककला, इतिहास और साहित्यिक विरासत अब देशभर के विद्यार्थियों तक पहुंचेगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा तैयार की जा रही पांचवीं कक्षा और आठवीं की नई पुस्तकों, विशेषकर सामाजिक विज्ञान विषय में छत्तीसगढ़ से संबंधित सामग्री को प्रमुखता दी गई है।
शिक्षा विभाग ने मंगलवार को यह जानकारी है। नई पाठ्यपुस्तकों में राज्य के प्रसिद्ध साहित्यकारों के साथ-साथ यहां की लोक-कथाओं और अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं को भी स्थान दिया गया है। इसके जरिए देश के करोड़ों बच्चे राज्य की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकेंगे।
पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के चर्चित मगरमच्छ 'गंगाराम' की कहानी पढ़ने को मिलेगी। सौ साल से अधिक उम्र का यह मगरमच्छ गांव के तालाब में रहता था। ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों के साथ उसका आत्मीय रिश्ता था और उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। इंसान और एक बेजुबान जीव के बीच बने इस अनूठे संबंध को पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा।
नई पुस्तकों में छायावाद के जनक पंडित मुकुटधर पांडेय और हिंदी पत्रकारिता के शलाका पुरुष पंडित माधवराव सप्रे की जीवनी को भी शामिल किया गया है। पंडित मुकुटधर पांडेय की जीवनी कक्षा 8वीं में पढ़ाई जाएगी, जबकि पंडित माधवराव सप्रे से संबंधित पाठ, जो पहले छठी कक्षा में था, अब आठवीं कक्षा के सिलेबस का हिस्सा होगा।
पाठ्यक्रम में एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत 'जो जीता वही सिकंदर' की जगह 'जो जीता वही बाजीराव' पाठ शामिल किया गया है। इसमें पेशवा बाजीराव के जीवन और उनकी सैन्य उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है। पेशवा बाजीराव ने अपने 40 वर्ष के जीवनकाल में 40 युद्ध लड़े और सभी में जीते।
एनसीईआरटी ने शिक्षकों के लिए भी पाठ्यक्रम को अपेक्षाकृत सरल करने की दिशा में बदलाव किया है। सामाजिक विज्ञान विषय में पहले 22 पाठ हुआ करते थे, जिन्हें अब घटाकर 12 पाठों में समेट दिया गया है।
इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों से किताबों में अपेक्षाकृत उपेक्षित रहे राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय भाषा और राष्ट्रीय चिह्नों से जुड़े अध्यायों को भी पुनः गरिमा के साथ प्रमुखता से शामिल किया गया है।
इस तरह एनसीईआरटी की नई पुस्तकों में छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति और साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने के साथ-साथ देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय विरासत को भी पाठ्यक्रम में प्रमुख स्थान दिया गया है।
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