लखनऊ , जून 3 -- उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण नियंत्रण और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 के दौरान एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण के स्तर में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाना है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क धूल, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी वेस्ट), हरित आवरण विस्तार तथा पराली प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में चल रही कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई।
श्री गोयल ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रमों में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। उन्होंने विभिन्न पोर्टलों, मोबाइल एप्लीकेशनों, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम तथा डैशबोर्ड को एकीकृत कर डिजिटल मॉनिटरिंग नेटवर्क विकसित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि 'नया सफर' योजना के तहत पुराने एवं प्रदूषणकारी वाहनों को हटाकर बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। एनसीआर के जिलों में 26.19 लाख एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों की पहचान की गई है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 वाहनों को स्क्रैप किया गया, जबकि 460 वाहनों को जब्त किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि 1 अक्टूबर से एनसीआर क्षेत्र में 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे स्थापित किए जाएंगे। सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ बनाने के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 975 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में इन शहरों में 100 ई-बसें संचालित हैं।
वायु गुणवत्ता निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए एनसीआर-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 43 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित किए जाने हैं। इनमें से 25 स्टेशन संचालित हैं, जबकि शेष 18 स्टेशन अक्टूबर 2026 तक स्थापित किए जाएंगे। औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के तहत 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) स्थापित कर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सर्वर से जोड़ा जा चुका है।
सड़क धूल नियंत्रण के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 3,666 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। अब तक 143.8 किलोमीटर सड़क पुनर्विकास कार्य पूरा किया जा चुका है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 37 सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाने हैं, जिनमें से 29 केंद्र संचालित हो चुके हैं। वहीं नगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत नोएडा में 600 टन प्रतिदिन क्षमता की टॉरिफाइड चारकोल परियोजना तथा 300 टन प्रतिदिन क्षमता की बायोगैस परियोजना विकसित की जा रही है।
बैठक में पौधारोपण, पराली प्रबंधन, सीबीजी संयंत्रों की स्थापना, ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, मेट्रो एवं आरआरटीएस विस्तार तथा अंतिम मील कनेक्टिविटी को भी वायु गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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