हॉन्ग कॉन्ग , सितंबर 21 -- एनवीडिया के चिप के इस्तेमाल से होने वाला कार्बन उत्सर्जन रूस की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी 'रशियन कोल' द्वारा बेचे जाने वाले कोयले को जलाने से होने वाले उत्सर्जन के बराबर हो सकता है। ग्रीनपीस ईस्ट एशिया से संबंधित एक नयी रिपोर्ट में यह दावा किया गया।
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, 2022 के बाद बेचे गए एनवीडिया के चिप को चलाने से 2025 में बिजली के स्रोत के आधार पर चार से 2.1 करोड़ टन तक कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन संभव है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2020 के बाद एनवीडिया की आपूर्ति शृंखला से होने वाला उत्सर्जन 725 प्रतिशत बढ़ा है। इसमें करीब 94 लाख टन की वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट तैयार करने वाले समूहों में शामिल ग्रीनपीस ईस्ट एशिया के अनुसार, उत्सर्जन में यह वृद्धि मुख्य रूप से एनवीडिया के ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के लिए जरूरी कलपुर्जों, सामग्रियों और विनिर्माण सेवाओं के उत्पादन से जुड़े उत्सर्जन के कारण हुई है।
एनवीडिया इन उत्सर्जनों को 'स्कोप-3' के तहत दर्ज करती है। इसमें कंपनी के प्रत्यक्ष संचालन के बाहर होने वाला अप्रत्यक्ष उत्सर्जन शामिल होता है। एनवीडिया की स्थिरता रिपोर्टों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, यह उत्सर्जन 2020 में करीब 13 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर से बढ़कर 2026 में 1.07 करोड़ टन हो गया।
रिपोर्ट के मुख्य लेखक और ओस्लो स्थित जलवायु एवं ऊर्जा विश्लेषक केतन जोशी ने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सबसे अधिक लाभ कमाने वाली कंपनी का जलवायु प्रभाव भी दुनिया में सबसे कम पारदर्शी प्रभावों में से एक है।"उन्होंने आरोप लगाया कि एनवीडिया का यह दावा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से "जलवायु को कुल मिलाकर लाभ" होता है, उद्योग द्वारा बढ़ते प्रदूषण को छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हरित छवि बनाने की रणनीति है। यह रिपोर्ट जलवायु, कॉरपोरेट जवाबदेही और डिजिटल अभियानों से जुड़े आठ समूहों ने जारी की है। इनमें ग्रीनपीस इंटरनेशनल, फ्रेंड्स ऑफ द अर्थ, बियॉन्ड फॉसिल फ्यूल्स और स्टैंड.अर्थ शामिल हैं।
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