दीमापुर , जुलाई 14 -- नागालैंड विश्वविद्यालय की एक सामुदायिक आधारित पहल ने जुनहेबोटोट जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मुर्गी पालन के जरिए 30.8 लाख रुपये से अधिक की आय करने में मदद कर उन्हें सशक्त बनाया है।

इस परियोजना ने साबित किया है कि अगर वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन और कम लागत वाले अंडों से बच्चे निकालने वाली मशीन का इस्तेमाल किया जाए, तो ग्रामीण आजीविका और पोषण सुरक्षा को काफी बढ़ाया जा सकता है। इस परियोजना ने एसएचजी को 30.8 लाख रुपये से अधिक की कमाई कराते हुए स्थानीय स्तर पर मुर्गी के मांस और अंडों की उपलब्धता भी बढ़ाई।

गौरतलब है कि 'कम लागत वाले अंडों से बच्चे निकालने वाली मशीन और घर के पीछे मुर्गी पालन के जरिए महिला एसएचजी की लगातार आजीविका और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना' परियोजना को नागालैंड विश्वविद्यालय के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), ज़ुनहेबोटोट ने लगभग 20 साल ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की आर्थिक मदद से पूरा किया है।

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