तेहरान , मार्च 30 -- ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि तेहरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) में अपनी सदस्यता की समीक्ष कर रहा है, जो पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

श्री बघाई ने टेलीविजन पर दिए बयान में कहा, "संसद इस मुद्दे की समीक्षा कर रही है और इस पर सार्वजनिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है। यह एक बड़ा प्रश्न है और इसका उत्तर सरल नहीं है।"उन्होंने कहा, "हमारे लोगों का स्वाभाविक सवाल है कि ऐसी संधि का सदस्य बने रहने का क्या लाभ, जिसके प्रभावशाली पक्ष हमें इसके तहत मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं का उपयोग करने नहीं देते।

एनपीटी 1970 में लागू हुई थी। यह केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों यानी अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में मान्यता देती है। भारत, पाकिस्तान और इज़रायल ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए, जबकि उत्तर कोरिया बाद में इससे अलग हो गया।

ईरान इस संधि का हस्ताक्षरकर्ता है। उसने परमाणु हथियार न बनाने के बदले शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के उपयोग का अधिकार प्राप्त किया है। वह लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को नागरिक उद्देश्यों के लिए बता रहा है, जबकि इज़रायल और अमेरिका उस पर परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाते रहे हैं।

इसी आधार पर दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराया है। इज़रायल परमाणु हथियार संपन्न ईरान को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है, जबकि अमेरिका इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने हितों के लिए जोखिम बताता है।

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