रांची , अगस्त 02 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में बालू के अवैध कारोबार पर झारखंड सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

श्री मरांडी ने पूछा है कि एनजीटी की रोक के बावजूद यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में यहां चल रहा है?श्री मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि एनजीटी द्वारा मॉनसून के दौरान नदियों से बालू उठाव पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद रांची सहित झारखंड के कई जिलों में बिना नंबर प्लेट और बिना वैध चालान के बालू लदे ट्रक बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह केवल पर्यावरणीय नियमों का ही उल्लंघन नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और राजस्व प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा है कि पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अवैध और अनियंत्रित बालू खनन नदियों की प्राकृतिक धारा को प्रभावित करता है, भूजल स्तर गिराता है, नदी तटों का कटाव बढ़ाता है और पर्यावरणीय संतुलन को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाता है।

श्री मरांडी ने सवालिया लहजे में पूछा है कि जब आम नागरिकों की बाइक और कार का कैमरों के जरिए चालान काटा जा सकता है, तो बिना नंबर प्लेट दौड़ रहे बालू तस्करों के ट्रकों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है?उन्होंने मुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर अवैध बालू खनन और परिवहन पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे झारखंड की नदियों और पर्यावरण की रक्षा तो होगी ही तथा राज्य के राजस्व को हो रही भारी क्षति पर भी रोक लगेगी।

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