नयी दिल्ली , जुलाई 02 -- इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में गुरूवार को 'लिविंग हेरिटेज इन मेटल, बैम्बू एंड क्ले: ट्रेडिशनल यूटेंसिल्स ऑफ नॉर्थईस्ट इंडिया' प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक बर्तनों, धातु, बांस और मिट्टी से बनी कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री चंचल कुमार ने आईजीएनसीए में राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्वोत्तर को 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में देखने की परिकल्पना इस प्रदर्शनी की मुख्य प्रेरणा है। यह प्रदर्शनी इस क्षेत्र की अपार सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक वैभव, आध्यात्मिक विरासत और विकास की संभावनाओं को रेखांकित करती है।

श्री कुमार ने प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान मणिपुर की लॉन्गपी पॉटरी, मेघालय की लार्नाई पॉटरी, असम की बेल-मेटल शिल्पकला तथा पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों के पारम्परिक काष्ठ शिल्प और टोकरीसाजी की सराहना की। उन्होंने सहभागी शिल्पकारों से संवाद भी किया। श्री कुमार ने उनकी पारम्परिक शिल्पकलाओं के जीवंत प्रदर्शन देखे और भारत तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उनके उत्कृष्ट शिल्प कौशल और सतत प्रयासों की प्रशंसा की।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के पूर्व सचिव के रूप में श्री कुमार ने इस प्रदर्शनी को क्षेत्र की पारम्परिक शिल्पकलाओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने विभिन्न कलाकृतियों के सांस्कृतिक महत्त्व पर शिल्पकारों के साथ विस्तार से चर्चा की और इन्हें भारत की विविधता का एक महत्त्वपूर्ण अंग बताया।

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