जालंधर , अगस्त 25 -- पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पिछले 15-20 वर्षों से ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को सिविल सर्जन कार्यालय और उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया तथा सहायक कमिश्नर (जनरल) को मांगपत्र सौंपा।

एनएचएम कर्मचारी 13 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों ने पहले सिविल सर्जन कार्यालय में धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद डॉ पंखुड़ी के नेतृत्व में उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और सहायक कमिश्नर (जनरल) जालंधर मोजर (डॉ.) वरुण कुमार को मांगपत्र सौंपते हुए अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. सुखविंदर कौर, डॉ. सुमित कपाही, सीएचओ सुखप्रीत कौर, डॉ. योगेश सचदेवा, परमवीर झमट, डॉ. पंकज, डॉ. गौरव और डॉ. सिलवरी सहित बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मचारी मौजूद थे। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार उनकी जायज मांगों के समाधान को लेकर टालमटोल की नीति अपना रही है और अभी तक कोई स्पष्ट सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। इससे प्रदेशभर के एनएचएम कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है। एनएचएम कर्मचारी यूनियन पंजाब ने कहा कि 13 अगस्त से जारी हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसके लिए उन्होंने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को तत्काल स्वीकार करने की मांग की।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान काम के लिए समान वेतन, ग्रेच्युटी और सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में वृद्धि शामिल हैं। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा सरकार का विभिन्न स्तरों पर घेराव किया जाएगा।

यूनियन नेताओं ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे एनएचएम कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी का असर आगामी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से उनकी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की अपील की।

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