नयी दिल्ली , जुलाई 27 -- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने उत्तर प्रदेश की 151 किमी लंबी बरेली-सीतापुर बीओटी (टोल) परियोजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मध्यस्थता मामले में बड़ी कानूनी सफलता हासिल की है।
आधिकारिक सूचना के अनुसार लगभग 3,177 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने रियायत ग्राही कंपनी के पक्ष में केवल 46 करोड़ रुपये तथा उस पर लागू ब्याज के भुगतान का आदेश दिया है।
एनएचएआई ने सोमवार को बताया कि यह मामला मेसर्स एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड की प्रवर्तित कंपनी बरेली हाइवेज प्रोजेक्ट लिमिटेड (बीएचपीएल) से संबंधित है। इस परियोजना का रियायत समझौता एनएचएआई ने मई 2019 में समाप्त कर दिया था। तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने अपने निर्णय में एनएचएआई के पक्ष को व्यापक रूप से स्वीकार करते हुए सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के संविदात्मक ढांचे को बरकरार रखा।
न्यायाधिकरण ने परियोजना से जुड़े रियायत समझौते के तहत दोनों पक्षों के दावों और प्रतिदावों की सुनवाई की। रियायत ग्राही ने लगभग 3,177 करोड़ रुपये के 30 दावे प्रस्तुत किए थे लेकिन विस्तृत विचार-विमर्श के बाद न्यायाधिकरण ने केवल तीन दावों को स्वीकार करते हुए 46 करोड़ रुपये तथा उस पर लागू ब्याज के भुगतान का आदेश दिया जबकि अधिकांश दावों को खारिज कर दिया।
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