नयी दिल्ली , अक्टूबर 09 -- भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 12 अक्टूबर को यहां होने वाले 33वें स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. बिद्युत रंजन सारंगी, विजया भारती सयानी और प्रियंक कानूनगो समेत वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे। समारोह में आयोग की 33 वर्षों की यात्रा और मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा की जायेगी।
आयोग ने कहा कि स्थापना दिवस के बाद 'जल जीवन का अमृत: जल के अधिकार द्वारा मानवीय गरिमा को बढ़ावा' विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। सम्मेलन में जल के अधिकार के आधार की सुरक्षा, जल निकायों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन तथा सभी लोगों के लिए सुरक्षित और सतत पेयजल उपलब्धता जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और मानवाधिकार रक्षकों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित एवं पर्याप्त जल तक पहुंच के मानवाधिकार संबंधी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जायेगा।
एनएचआरसी ने 12 अक्टूबर 1993 को स्थापना के बाद से अब तक 24,33,716 मामलों पर कार्रवाई की है, जिनमें 3,100 स्वतः संज्ञान मामले शामिल हैं। आयोग ने मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को 9,085 मामलों में 274 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दिये जाने की सिफारिश की है। एक अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक आयोग को 54,673 शिकायतें मिलीं और 119 मामले स्वतः संज्ञान में लिये गये। इस अवधि में 53,733 मामलों का निस्तारण किया गया और 157 मामलों में पीड़ितों को 9.7 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता देने की सिफारिश की गयी।
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