पंचकूला , अगस्त 17 -- राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में सोमवार को महर्षि चरक जयंती श्रद्धापूर्वक मनायी गयी।

इस अवसर पर आयोजित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों की आधुनिक चिकित्सा पद्धति में निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का आयोजन एनआईए के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रो. गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. गौरव गर्ग, उप चिकित्सा अधीक्षक, तथा प्रो. प्रह्लाद रघु ने दीप प्रज्वलित कर किया।

विशेष व्याख्यान देते हुए एनआईए जयपुर के प्रोफेसर वैद्य असित कुमार पांजा ने कहा कि चरक संहिता केवल प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन, रोगों के कारणों की पहचान, उपचार पद्धति और चिकित्सा नैतिकता का व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आचार्य चरक ने चिकित्सा को केवल रोग दूर करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि रोगी के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से बल दिया।

प्रो. पांजा ने आचार्य चरक के चिकित्सा-दर्शन, चिकित्सक के दायित्व, आहार-विहार और दिनचर्या के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चरक संहिता में दिए गए अनेक सिद्धांत आज भी स्वस्थ जीवन और रोगों की रोकथाम के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. गौरव गर्ग ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे चिकित्सा विज्ञान के दौर में भी आचार्य चरक के मूलभूत सिद्धांतों का महत्व कायम है। उन्होंने आयुर्वेद के विद्यार्थियों और शोधार्थियों से चरक संहिता के मूल सिद्धांतों को गहराई से समझने और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

प्रो. प्रह्लाद रघु ने विद्यार्थियों को चरक संहिता का नियमित अध्ययन करने तथा उसके सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक चिकित्सा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रोगी-केंद्रित चिकित्सा, चिकित्सकीय आचरण तथा स्वस्थ जीवनशैली और रोगों की रोकथाम में आहार-विहार की भूमिका पर जोर दिया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. धवल जी. मकवाना और डॉ. महेश एम. ने आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने चरक संहिता के चयनित श्लोकों का सामूहिक पाठ किया। इसके बाद श्लोक उच्चारण एवं संहिता-पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के उच्चारण और पाठ-कौशल का मूल्यांकन प्रो. प्रह्लाद रघु, डॉ. मनीष पमनानी, डॉ. आकांक्षा राणा और डॉ. सुनीता यादव के निर्णायक मंडल ने किया।

इस अवसर पर डॉ. रितेश, डॉ. गरिमा गुप्ता, डॉ. मैत्रेयी एच.एस. और चंद्रमोहन सहित संस्थान के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित