नयी दिल्ली , जून 02 -- पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सड़क अवरुद्ध करने और न्यायिक अधिकारियों को अवैध रूप से बंधक बनाने के चार अलग-अलग मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने आरोपपत्रों में कुल 31 लोगों का नाम शामिल किया है।
अप्रैल में राज्य विधानसभा चुनावों से पहले क्षेत्र में हुई घटनाओं के संबंध में विभिन्न डिजिटल/तकनीकी, लिखीत एवं मौखिक साक्ष्यों के साथ-साथ कई गवाहों की जांच के आधार पर एनआईए विशेष न्यायालय, कोलकाता के समक्ष आरोप पत्र दायर किए गए हैं।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 और पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत आरोप लगाए गए हैं।
आरोपपत्रों में प्रत्येक आरोपी की विशिष्ट भूमिकाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है जो मालदा जिले के विभिन्न स्थानों पर एसआईआर कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों की सड़क नाकाबंदी और अवैध बंधक/प्रतिबंध में उनकी संलिप्तता को स्पष्ट रूप से स्थापित करता है।
एनआईए ने उच्चतम न्यायालय के स्वतः संज्ञान एवं निर्देश के बाद मामलों की जांच को अपने हाथ में लिया और पाया कि आरोपियों ने समन्वित तरीके से गैरकानूनी सभाओं में हिस्सा लिया, सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध किया, सरकारी अधिकारियों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न की और एसआईआर अभ्यास में लगे न्यायिक अधिकारियों को गलत तरीके से रोका।
उनके कार्यों से वैधानिक चुनावी प्रक्रिया का संचालन करने और लोक सेवकों द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन में बाधा उत्पन्न हुई। एनआईए ने अपने आरोपपत्रों में स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपियों ने अपनी गैरकानूनी गतिविधियों से क्षेत्र में कानून व्यवस्था को भी बाधित किया।
एनआईए इस साजिश में शामिल अन्य फरार आरोपियों एवं संदिग्धों की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन पर मुकदमा चलाने के लिए अपनी जांच जारी रखी हुई है, जो गैरकानूनी कार्यों में भी शामिल रहे हैं और जिन्होंने संवैधानिक एवं वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया और सार्वजनिक जीवन को बाधित किया।
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