चेन्नई , सितंबर 25 -- चेन्नई (पूनमल्ली) स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में कोयंबटूर में 'हिंदू मुन्नानी' के प्रवक्ता सी. शशिकुमार की हत्या के मामले में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
गौरतलब है कि चेन्नई के पूनमल्ली में बम धमाकों और एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए बनी विशेष अदालत, तमिलनाडु में राष्ट्रीय जांच एजेंसी और उससे जुड़े आतंकवाद के मामलों की सुनवाई के लिए तय विशेष अदालत के तौर पर काम करती है।
'हिंदू मुन्नानी' के प्रवक्ता सी. शशिकुमार का कोयंबटूर में हमलावरों के एक समूह ने पीछा किया और उनकी हत्या कर दी। यह घटना 22 सितंबर 2016 को हुई थी। इस मामले की जांच पहले तमिलनाडु पुलिस की अपराध शाखा-आपराधिक जांच विभाग शाखा ने की थी लेकिन कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका सामने आने के बाद इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया। एनआईए ने चार मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान करते हुए उन्हें गिरफ़्तार किया और बताया कि वे पीएफआई से जुड़े थे।
आरोपपत्र दाखिल होने और मुकदमा पूरा होने के बाद विशेष न्यायाधीश सुश्री एस. मलारविझी ने फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। आरोपियों में सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद रफकुल हसन शामिल थे, जिनके बारे में कहा गया कि वे प्रतिबंधित पीएफआई के सदस्य थे।
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