नैनीताल , मई 30 -- उत्तराखंड में हल्द्वानी के पास रानीबाग स्थित हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) कामगार संघ की ओर से दायर याचिकाओं पर उच्च न्यायालय में शनिवार से सुनवाई शुरू हुई।
ये याचिकाएं कामगार संघ और अन्य की ओर से एकलपीठ के आदेश के खिलाफ पृथक- पृथक दायर की गयी है। इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान संघ की ओर से पअधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता की ओर से कहा गया कि वर्ष 1953 में एचएमटी अस्तित्व में आयी। वर्षों तक ठीक चलने के बाद फैक्ट्री घाटे में चलने लगी।
वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने एचएमटी वाच, एचएमटी चिनार और एचएमटी बेरिंग को शर्तों के साथ बंद करने का निर्यण ले लिया। अंततः 2018 में फैक्ट्री को बंद कर दिया। साथ ही कार्मिकों को वर्ष 2007 के नोशनल वेतनमान को आधार मानते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने का आदेश एचएमटी प्रबंधन को दे दिया। प्रबंधन की ओर से तय मानकों अनुपालन नहीं किया गया जबकि केन्द्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि आरोप गलत हैं।
एचएमटी प्रबंधन के इस फैसले को संघ और कामगारों की ओर से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई जिसे एकलपीठ ने खारिज कर दिया था। इस आदेश को कामगार संघ ने वर्ष 2022 में स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी है। तब से यह मामला लटका हुआ है। अगली तिथि पर केंद्र सरकार और एचएमटी की ओर से दलील पेश की जाएगी।
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