भुवनेश्वर , अक्टूबर 23 -- होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ ओडिशा (एचआरएओ) के अध्यक्ष जे. के. मोहंती ने ओडिशा को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए संपर्क सुविधाओं को मजबूत करने, पर्यटन बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने, नये निवेश आकर्षित करने तथा पर्यटन स्थलों के प्रबंधन में सुधार के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने की मांग की है।

श्री मोहंती ने शुक्रवार को सातवें ओडिशा पर्यटन सम्मेलन को संबोधित करते हुए निवेश, संपर्क सुविधाओं, पर्यटन स्थलों के विकास और पर्यटन प्रचार को शामिल करते हुए समयबद्ध पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने के लिए सरकार और उद्योग जगत की संयुक्त कार्यबल गठित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने राज्य सरकार से प्रमुख पर्यटन सर्किटों के लिए व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का भी आग्रह किया। इनमें जिम्मेदारियों, बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं और क्रियान्वयन की समय-सारिणी का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

ओडिशा में पर्यटन के विकास में संपर्क सुविधाओं को सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बताते हुए श्री मोहंती ने कहा कि राज्य को घरेलू हवाई सेवाओं को मजबूत करने और टिकाऊ अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क स्थापित करने के लिए विमानन कंपनियों तथा हवाई अड्डा प्राधिकरणों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, बशर्ते ये सेवाएं व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हों।

एचआरएओ ने जयपुर, इंदौर, बागडोगरा, गोवा, देहरादून और कोच्चि के लिए बंद हो चुकी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने की भी मांग की। दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी ओडिशा तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए जयपुर और झारसुगुड़ा हवाई अड्डों को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

श्री मोहंती ने कहा, "हमें बाजार अध्ययन, विमानन कंपनियों के साथ साझेदारी और संयुक्त पर्यटन प्रचार के सहयोग से भुवनेश्वर से सिंगापुर, बैंकॉक, कुआलालंपुर और दुबई के लिए टिकाऊ सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्राथमिकता देनी चाहिए।" उन्होंने ओडिशा को कोलकाता, वाराणसी, बोधगया और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल करने वाले स्थापित यात्रा मार्गों से जोड़ने के लिए विदेशी टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंटों, ऑनलाइन यात्रा मंचों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संगठनों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी वकालत की।

श्री मोहंती ने कहा कि ओडिशा में असाधारण प्राकृतिक आकर्षण, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आतिथ्य की मजबूत परंपरा और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली अनुकूल नीतियां मौजूद हैं। चुनौती इन खूबियों को बेहतर संपर्क सुविधाओं, पेशेवर प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले पर्यटन अनुभवों में बदलने की है। उन्होंने कहा, "हमें आध्यात्मिकता, विरासत, वन्यजीव, प्रकृति, समुद्र तटों, संस्कृति, खानपान, स्वास्थ्य और कल्याण तथा साहसिक गतिविधियों को मिलाकर सात, 14 और 21 रातों के आकर्षक यात्रा कार्यक्रम विकसित करने चाहिए।"उन्होंने कहा कि राज्य का विस्तृत समुद्र तट, जनजातीय परंपराएं, ओडिसी नृत्य, हथकरघा, हस्तशिल्प, खानपान और त्योहार ऐसी महत्वपूर्ण खूबियां हैं, जिनके माध्यम से ओडिशा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के व्यापक वर्ग को आकर्षित कर सकता है। उन्होंने वनों, झीलों, समुद्र तटों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन का विकास राज्य की प्राकृतिक विरासत से समझौता किये बिना समृद्धि लाने वाला होना चाहिए।

पर्यटन मंत्रालय की इंडिया टूरिज्म स्टैटिस्टिक्स 2026 का उल्लेख करते हुए श्री मोहंती ने कहा कि भारत में 2025 के दौरान घरेलू पर्यटकों की आवाजाही लगभग 428.55 करोड़ दर्ज की गयी, जबकि विदेशी पर्यटकों की यात्राओं की संख्या 2.53 करोड़ रही। हालांकि, उनके द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा में घरेलू पर्यटकों की यात्राओं की संख्या लगभग 1.28 करोड़ और विदेशी पर्यटकों की यात्राओं की संख्या 62,115 रही।

विदेशी पर्यटकों की यात्राओं के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र लगभग 45-45 लाख यात्राओं के साथ प्रमुख राज्यों और गंतव्यों में शामिल रहे। इनके बाद पश्चिम बंगाल में 40 लाख, दिल्ली में 24 लाख और गुजरात में 23 लाख यात्राएं दर्ज की गईं। इन गंतव्यों का संयुक्त रूप से विदेशी पर्यटकों की कुल यात्राओं में लगभग 70.3 प्रतिशत हिस्सा रहा।

श्री मोहंती ने कहा, "ओडिशा के पास असाधारण पर्यटन संसाधन होने के बावजूद पर्यटन में उसकी हिस्सेदारी बहुत कम है।" उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में राज्य की स्थिति बेहतर बनाने के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रचार, बेहतर हवाई संपर्क, पर्यटकों के लिए उन्नत सुविधाओं और पेशेवर तरीके से तैयार किए गए पर्यटन उत्पादों की आवश्यकता है।

एचआरएओ अध्यक्ष ने निवेश को केवल स्थापित पर्यटन केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी ओडिशा में भी फैलाने की मांग की। श्री मोहंती के अनुसार, भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क का स्वर्णिम त्रिकोण ओडिशा पर्यटन का आधार बना रहेगा, लेकिन इसके साथ चिलिका, गोपालपुर, बौद्ध विरासत स्थलों, भीतरकनिका, सिमलीपाल, सतकोसिया, देब्रीगढ़, हीराकुंड, कोरापुट और देवमाली को शामिल करने वाले सुविकसित पर्यटन सर्किट भी विकसित किए जाने चाहिए।

श्री मोहंती ने बड़े पैमाने पर पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि एचआरएओ ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत डिज्नी या यूनिवर्सल स्टूडियो जैसे वैश्विक संचालकों के साथ साझेदारी में समुका बीच पर विश्वस्तरीय विशाल थीम पार्क विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि प्रीमियम होटल, सम्मेलन केंद्र, खरीदारी की सुविधाओं, मनोरंजन आकर्षणों और टिकाऊ बुनियादी ढांचे से युक्त एकीकृत पर्यटन शहर इस क्षेत्र को प्रमुख पर्यटन और निवेश केंद्र में बदल सकता है।

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