हमीरपुर , मई 26 -- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिला का प्रसव कराने से इंकार करने के मामले में जिला महिला अस्पताल हमीरपुर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मौदहा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ को मामले की जांच सौंपी गई है।
जांच अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने मंगलवार को बताया कि महोबा जिले के खन्ना क्षेत्र निवासी दंपती एचआईवी पॉजिटिव हैं। महिला के पति ने प्रसव के लिए पत्नी को मौदहा सीएचसी में भर्ती कराया था, जहां एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिलने पर स्टाफ ने प्रसव कराने से मना कर दिया और जिला महिला अस्पताल हमीरपुर रेफर कर दिया।
उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल पहुंचने पर भी रेफरल कार्ड देखते ही महिला को तत्काल कानपुर रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एचआईवी पॉजिटिव प्रसूताओं का हर हाल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराया जाए। इसके लिए विशेष किट और चिकित्सकीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है।
बताया गया कि 21 मई को महिला ने कानपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव कराया, जिसमें परिवार का लगभग 40 हजार रुपये खर्च हो गया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हमीरपुर पहुंचकर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल से शिकायत की। जिलाधिकारी ने मामले की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गीतम सिंह को सौंपी, जिन्होंने आगे जांच डिप्टी सीएमओ को दे दी।
जांच के दौरान मौदहा सीएचसी अधीक्षक डॉ. रजत तिवारी ने कहा कि स्टाफ ने महिला को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया था और उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. के.एस. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में पूर्व में एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं तथा इसके लिए अलग ऑपरेशन थिएटर और विशेष किट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि महिला को रेफर किए जाने की जानकारी की जांच कराई जाएगी।
डॉ. मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल का अधिकांश स्टाफ इस प्रकार के मामलों में प्रशिक्षित नहीं है। वहीं जांच अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने दावा किया कि एचआईवी संक्रमित महिलाओं के प्रसव संबंधी मामलों में स्वास्थ्य केंद्रों पर लगभग 90 प्रतिशत स्टाफ अप्रशिक्षित है, जबकि सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में एचआईवी जांच की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई प्रसूताओं की जांच किए बिना ही प्रसव करा दिया जाता है। साथ ही महिला अस्पताल की काउंसलर को पुरुष अस्पताल से संबद्ध किए जाने के कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों की सूचना आईसीटीसी को दी जानी चाहिए, लेकिन कई बार ऐसा नहीं किया जाता।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित