पटियाला , फरवरी 10 -- पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने एक वर्ष में घाटे को 2.5 प्रतिशत तक कम करने और इस प्रकार अगले वर्ष उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के तर्क पर सवाल उठाया है।

एसोसिएशन के महासचिव अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि पंजाब स्टेट पॉवर कार्पोंरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने 2026-27 के लिए अपने संशोधित वार्षिक राजस्व अनुमान में वितरण घाटे का अनुमान लगाया है और लक्ष्य घाटे को 10 प्रतिशत निर्धारित किया है, जबकि मूल रूप से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह 12.75 प्रतिशत अनुमानित था। उन्होने कहा कि पीएसपीसीएल ने मूल रूप से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12.75 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 12.50 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028-29 के लिए 12.20 प्रतिशत के वितरण घाटे का अनुमान लगाया था। एक वर्ष के भीतर 2.75 प्रतिशत की कमी का उद्देश्य मुख्य रूप से बिजली खरीद लागत में कमी का अनुमान लगाना था, जिससे अगले वित्तीय वर्ष के लिए कम टैरिफ की आवश्यकता दर्शाई जा सके।

उन्होने कहा कि मौजूदा जमीनी परिस्थितियों में एक वर्ष में 2.75 प्रतिशत वितरण घाटे की कमी हासिल करना न तो व्यावहारिक है और न ही तकनीकी रूप से संभव है। इसके अलावा, संशोधित एआरआर में 3581.95 करोड़ रुपये की हानि निधि को गैर-टैरिफ आय के रूप में मानना, हानि निधि के मूल उद्देश्य को ही नकार देता है और वित्तीय स्थिति को विकृत कर देता है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह दृष्टिकोण वित्तीय बोझ को आने वाले वर्षों तक टालने के उद्देश्य से अपनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप बाद में और भी अधिक और अनिश्चित टैरिफ लागू होंगे, जो अंततः उपभोक्ताओं और पीएसपीसीएल पर बोझ डालेंगे।

इस बीच पंजाब सरकार द्वारा संशोधित वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को कुछ हजार तक कम करने के निर्णय के बाद औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता अगले वित्तीय वर्ष के लिए शुल्क में कमी की उम्मीद कर रहे थे। अब जो अनुमान लगाया जा रहा है, उसके अनुसार चुनाव वर्ष में शुल्क में कोई वृद्धि नहीं होगी।

पीएसपीसीएल ने नियामक आयोग (पीएसईआरसी) के समक्ष संशोधित आबंटित मूल्यांकन रिपोर्ट (एआरआर) प्रस्तुत की है, जिसमें नवंबर में प्रस्तुत मूल आबंटित मूल्यांकन रिपोर्ट से 1304 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया गया है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली खरीद लागत 34081 करोड़ रुपये से घटकर 32065 करोड़ रुपये हो गई है, यानी 2016 करोड़ रुपये का अंतर है। शुद्ध टैरिफ आय अब 51106 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि नवंबर में यह 52410 करोड़ रुपये थी।

वरिष्ठ इंजीनियरों का कहना है कि केवल दिखावटी बदलाव किए गए हैं, अन्यथा मूल एआरआर आंकड़ों के अनुसार वही टैरिफ जारी रहने की उम्मीद थी।

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