नयी दिल्ली , सितंबर 08 -- दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार अगले एक से दो माह में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के लिए व्यापक नीति और नियमन लेकर आयेगी।
श्री सूद ने सत्य निकेतन हादसे के बाद आज यहाँ छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान मंत्री ने उनकी समस्याएं सुनीं और छात्र आवास को सुरक्षित बनाने के लिए दीर्घकालिक उपायों का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 'पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक, 2026' में पीजी संचालन के लिए अनिवार्य लाइसेंस, जोनवार किराया सीमा, संरचनात्मक एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट और केंद्रीय 'जीओवीपीजी' पोर्टल का प्रावधान किया जायेगा। पोर्टल पर किराया, भोजन, उपलब्ध सुविधाओं और भवन की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि पीजी संचालकों, अभिभावकों और नागरिक एजेंसियों से विचार-विमर्श के बाद नीति को अंतिम रूप दिया जायेगा।
छात्रों ने बैठक में किराये के समझौतों की शर्तों का पालन न होने, बिजली के मनमाने शुल्क, सुरक्षा ऑडिट और संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाण-पत्र जैसी समस्याएं उठायी। इस पर श्री सूद ने कहा कि सरकार ऐसे कानूनी प्रावधानों की संभावना तलाश रही है, जिससे किराया समझौते प्रभावी रूप से बाध्यकारी बनाये जा सकें।
उन्होंने बताया कि दक्षिणी परिसर और मुखर्जी नगर सहित प्रमुख छात्र क्षेत्रों में एक सप्ताह के भीतर कड़े संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने तथा हॉस्टल के लिए एफएआर सीमा बढ़ाने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हो चुकी है। आगे मंत्रिमंडल और हितधारकों से चर्चा के बाद अगले एक से डेढ़ माह में नीति को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। सत्य निकेतन हादसे पर विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय छात्र सुरक्षा, व्यवस्थित सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर है।
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