मुंबई , अगस्त 26 -- महाराष्ट्र के भुलेश्वर में एक बड़ी गणेश प्रतिमा से जुड़ी हालिया दुर्घटना के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने आगामी गणेशोत्सव के दौरान अत्यधिक बड़ी मूर्तियों के परिवहन और आगमन के लिए सख्त सुरक्षा उपाय लागू करने का फैसला किया है।
सुरक्षा के इस नये ढांचे के तहत एक टन से अधिक वजन की गणेश प्रतिमाओं के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जायेगा। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी मूर्तियों को कार्यशालाओं से गणेश मंडलों तक सुरक्षित ले जाया जा सके और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर उनकी आवाजाही के दौरान हादसों की आशंका को कम किया जा सके।
नागरिक प्रशासन ने बड़ी गणेश प्रतिमाओं का ऑर्डर दिये जाने से लेकर उनके तैयार होने और संबंधित गणेश मंडल तक पहुंचने तक का पूरा रिकॉर्ड रखने का भी निर्णय लिया है। निगरानी तंत्र के तहत मूर्ति के निर्माण, वजन, कार्यशाला, परिवहन व्यवस्था और अन्य संबंधित जानकारियों को दर्ज किया जायेगा।
गणेश प्रतिमा के आगमन के दौरान भुलेश्वर में हुई दुर्घटना के बाद यह फैसला बेहद अहम हो गया है। इस घटना ने घनी आबादी वाले इलाकों से बड़ी और भारी मूर्तियों को ले जाने की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है। नगर निगम के अधिकारी अब ऐसी मूर्तियों की निगरानी के लिए अधिक व्यवस्थित तंत्र की ओर देख रहे हैं, ताकि सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। भारी मूर्तियों की आवाजाही के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू किये जाने की उम्मीद है।
अधिकारी मूर्तियों को ले जाने की अनुमति देने से पहले उनके ढांचागत स्थायित्व, परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन, चढ़ाने-उतारने की व्यवस्था, रास्ते की स्थिति और अन्य सुरक्षा आवश्यकताओं जैसे पहलुओं की जांच करेंगे। बड़ी गणेश प्रतिमाओं के सुरक्षित परिवहन और स्थापना के लिए एक विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के उद्देश्य से उप नगर आयुक्त (डीएमसी) जोन-2 के अधिकारी प्रशांत सपकाले की अध्यक्षता में गुरुवार को एक बैठक बुलायी गयी है। बैठक में बड़ी मूर्तियों की सुरक्षा, फिटनेस और ढांचागत स्थायित्व प्रमाणपत्रों, परिवहन नियमों और अन्य एहतियाती उपायों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
नागरिक प्रशासन मूर्तिकारों, गणेश मंडलों, ट्रांसपोर्टरों और नगर निगम अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के तरीकों की भी समीक्षा कर सकता है।
अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस प्रस्तावित प्रणाली का उपयोग कर संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करेंगे और मूर्ति को ले जाने से पहले आवश्यक सुधारात्मक कदम उठायेंगे। इस पहल का मकसद न केवल दुर्घटनाओं को रोकना है, बल्कि त्योहारों के मौसम में बड़ी गणेश प्रतिमाओं के आगमन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाना भी है।
मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में गणेश प्रतिमाओं की संख्या और उनका आकार लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नगर निगम के इन प्रस्तावित नियमों से मूर्ति के निर्माण, उसके प्रमाणन, परिवहन और मंडल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही तय होगी। सुरक्षा से जुड़े अंतिम दिशा-निर्देश और आवश्यकताएं गुरुवार को होने वाली बैठक के बाद साफ हो जायेंगी।
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