पटना , जुलाई 24 -- बिहार विधानसभा में शुक्रवार को उस समय जोरदार हंगामा हुआ, जब राज्य सरकार ने सदन को बताया कि सरकारी अभिलेखों में भूमिहार समुदाय को आधिकारिक रूप से "भूमिहार ब्राह्मण" के रूप में दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है।भारतीय जनता पार्टी (भाजप विधायक जीवेश मिश्रा के ध्यानाकर्षण के उत्तर में उपमुख्यमंत्री विजयेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार में किसी जाति विशेष को "भूमिहार ब्राह्मण" के रूप में दर्ज करने का कोई कानूनी या प्रशासनिक प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को इस संबंध में कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है कि सरकारी अभिलेखों में इस नामकरण को आधिकारिक रूप से अपनाया जाए।
श्री यादव ने कहा कि यदि किसी सरकारी दस्तावेज में वर्तमान नियमों के विपरीत "भूमिहार- ब्राह्मण" शब्द का उल्लेख है, तो उसे निर्धारित नियमों के अनुसार संशोधित किया जाएगा।
मंत्री के इस जवाब पर भूमिहार समुदाय से आने वाले भाजपा विधायकों ने तीखा विरोध जताया और सरकार पर उनकी जाति की ऐतिहासिक पहचान से इंकार करने का आरोप लगाया।
बिहार विधानसभा में यह विवाद तब शुरू हुआ, जब भाजपा विधायक जीवेश कुमार मिश्रा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से पूछा कि सरकारी अभिलेखों में भूमिहार - ब्राम्हण जाति का उल्लेख केवल "भूमिहार" के रूप में क्यों किया जाता है।
सरकार ने जब अनुकूल जवाब नही दिया, तब जीवेश मिश्रा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे "तथ्यात्मक रूप से गलत" बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1931 की जाति जनगणना में इस समुदाय को "भूमिहार ब्राह्मण" के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के कई आधिकारिक अभिलेखों में भी यही नामकरण आज भी प्रयुक्त होता है।
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