पटना , जून 16 -- ाज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में अब कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई सीबीएसई माध्यम से होगी। केंद्र सरकार से इस संबंध में अनुमति मिल चुकी है। वर्तमान में बिहार में तीन एकलव्य स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें पश्चिम चंपारण के बेलासड़ी, जमुई के आस्था और कैमूर के अधौरा शामिल हैं। प्रत्येक स्कूल में लगभग 600 बच्चे पढ़ रहे हैं, इस प्रकार कुल करीब 1800 आदिवासी छात्र-छात्राएं इन विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन तीनों क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय की बहुलता है। विभाग ने आदिवासी बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की है। एससी-एसटी मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि सीबीएसइ पैटर्न लागू होने के बाद सभी एकलव्य स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में जल्द ही डिजिटल लैब, अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक और कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार के 24 जिलों में आदिवासियों की कुल जनसंख्या 13 लाख 36 हजार है। इनमें जमुई, कैमूर और पश्चिम चंपारण जिलों में आदिवासी आबादी अधिक है। इन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और संरक्षण के लिए एकलव्य विद्यालय खोले जा रहे हैं। सीबीएसइ पैटर्न लागू होने से अब इन विद्यालयों के गरीब एवं जनजातीय परिवारों के बच्चे भी नीट, जेईई तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में देश के अन्य छात्रों के साथ बराबरी से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।

कैमूर के अधौरा स्थित एकलव्य स्कूल में एक साल पहले कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर 70 से अधिक नाबालिग लड़कियों की ट्रैफिकिंग का मामला सामने आया था, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

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