पुरी , जुलाई 20 -- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गुंडिचा मंदिर में मुख्य आराध्य देवी-देवताओं के वार्षिक नौ दिवसीय प्रवास के दौरान पुरी के 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर में व्यापक मरम्मत और संरक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया है।

एएसआई के अधिकारियों, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) के विशेषज्ञों, आईआईटी मद्रास और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के तकनीकी सदस्यों की एक विशेषज्ञ टीम मंदिर के गर्भगृह, नाट्यमंडप, जगमोहन और भोग मंडप का विस्तृत संरचनात्मक मूल्यांकन कर रही है।

श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने कहा कि मरम्मत और संरक्षण का कार्य उस 10 दिनों की अवधि के भीतर पूरा करने का कार्यक्रम है, जब देवी-देवता गुंडिचा मंदिर में रहते हैं, जिससे विशेषज्ञों को मंदिर के अनुष्ठानों में बाधा डाले बिना जीर्णोद्धार गतिविधियों को करने का अवसर मिल सके।

एएसआई की टीम और तकनीकी विशेषज्ञों ने संरक्षण योजना को अंतिम रूप देने तथा कार्य की प्रगति की निगरानी के लिए मंदिर प्रशासन के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।

श्री पाढ़ी ने यह भी कहा कि मंदिर की संरचना के संरक्षण को बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत नाट्यमंडप में एयर-कंडीशनिंग सिस्टम लगाने का काम शुरू हो गया है।

इस बीच रविवार को 1978 के इन्वेंट्री रिकॉर्ड के आधार पर देवी-देवताओं के आभूषणों की सूची बनाने और उनके सत्यापन का कार्य किया गया। जिन आभूषणों का सत्यापन किया जा रहा है, उनमें स्वर्ण चित्ता, राहु रेखा, झोबा और रसिका सुना थंतिया शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार के निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार 3डी मैपिंग, डिजिटल दस्तावेज़ीकरण और वीडियोग्राफी के जरिये सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

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