नयी दिल्ली , अगस्त 28 -- दुनिया भर में कृषि खाद्य क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के बीच गूगल डीपमाइंड द्वारा विकसित एआई मॉडल भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

गूगल की ओर से शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि एग्रीकल्चर लैंडस्केप अंडरस्टैंडिंग (एएलयू) और एग्रीकल्चर मॉनिटरिंग एंड ईवेंट डिटेक्शन (एएमईडी) उपग्रह चित्रों का उपयोग करके खेतों की सीमाओं का मानचित्रण करने और कृषि गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं।

मूल रूप से भारत के कृषि पारितंत्र को समर्थन देने के लिए विकसित किये गये इन मॉडलों के परिणाम एशिया-प्रशांत और अफ्रीका के 11 देशों में विश्वसनीय परीक्षकों के साथ साझा किये जा चुके हैं। इन मॉडलों से प्राप्त डेटा को एपीआई और गूगल अर्थ के माध्यम से कृषि क्षेत्र के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है। एएलयू डेटा लेयर वैश्विक स्तर पर गूगल अर्थ की सबसे लोकप्रिय लेयरों में से एक है।

गूगल ने बताया कि कार्बनफार्म कंपनी ने एएलयू एपीआई और जेमिनाई का उपयोग करके खेत-स्तर की जानकारी, विशेष रूप से खेतों की सीमाओं के निर्धारण, को स्वचालित किया है। इसका उपयोग ऐसे कार्यक्रमों में किया जा रहा है जिनका उद्देश्य धान की खेती के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है। यह वर्ष 2030 तक 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम-कार्बन उत्सर्जन वाली धान की खेती को बढ़ावा देने के कार्बनफार्म के प्रयासों का हिस्सा है।

एक अन्य कंपनी टेरास्टैक ने एएलयू और एएमईडी एपीआई का उपयोग करके एक स्पैटियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसने 14 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि का मानचित्रण किया है। इससे खेतों के भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता कम हुई है। यह भारत के कृषि पारितंत्र को अधिक तेज और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बना रहा है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।

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