लखनऊ , फरवरी 23 -- किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त करते हुए उत्तर प्रदेश में पहली बार चार मरीजों पर कोरोवेंटिस सिस्टम का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। प्रदेश में इस तकनीक का प्रयोग पहली बार किया गया है।

सोमवार को विभाग प्रमुख डॉ ऋषि सेठी ने कहा कि यह अत्याधुनिक तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिन्हें सीने में दर्द (एंजाइना) की शिकायत होती है, लेकिन उनकी कोरोनरी धमनियों में गंभीर रुकावट (नॉन-क्रिटिकल कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज) नहीं पाई जाती। ऐसे मामलों में उपचार संबंधी निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण होता है।

उन्होंने बताया कि कोरोवेंटिस सिस्टम के माध्यम से कोरोनरी फिजियोलॉजी का सटीक आकलन संभव हो पाता है, जिससे वास्तविक रूप से महत्वपूर्ण अवरोधों की पहचान कर अनावश्यक स्टैटिंग से बचाव किया जा सकता है तथा मरीजों को लक्षित एवं वैज्ञानिक आधार पर उपचार प्रदान किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन मिलान (इटली) से आर्थी विशेषज्ञ डॉ. लुडोविका माल्टीज़ के विशेष मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में संपन्न किया गया। जिन चार मामलों में कोरोवेंटिस सिस्टम का उपयोग किया गया। उनका नेतृत्व डॉ. मोनिका भंडारी, डॉ. आयुष शुक्ला एवं डॉ. अभिषेक सिंह द्वारा किया गया। जबकि डॉ. ऋषि सेठी, डॉ. शरद चंद्रा, डॉ. अक्षयया प्रधान, डॉ. गौरव चौधरी तथा डॉ. अखिल शर्मा द्वारा आवश्यक अकादमिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित