ऋषिकेश , अगस्त 09 -- उत्तराखंड के ऋषिकेश में ग्राम पंचायत रायवाला में बढ़े हुए पेयजल बिलों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। रविवार को ग्राम सभा रायवाला में आयोजित खुली बैठक में सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के तहत भेजे जा रहे भारी-भरकम बिलों का विरोध करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान सागर गिरी ने की। महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के नाम पर ग्रामीण क्षेत्र में लागू की जा रही अर्द्धनगरीय दरें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएंगी। ग्रामीणों ने मांग की कि पेयजल कनेक्शनों में आवश्यक संशोधन कर ग्राम सभा क्षेत्र के अनुरूप बिल निर्धारित किए जाएं और उपभोक्ताओं को भारी-भरकम एकमुश्त बिलों के बजाय निर्धारित एवं उचित मासिक फिक्स बिल उपलब्ध कराया जाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2019 में योजना के गठन के समय श्यामपुर न्याय पंचायत के अंतर्गत केवल पांच ग्राम सभाओं-ऋषिकेश ग्रामीण, खदरी-खड़कमाफ, गुमानीवाला, हरिपुर कला और प्रतीतनगर-को ही योजना में शामिल किया गया था। इसके बाद जल संस्थान द्वारा रायवाला ग्राम सभा को भी अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के दायरे में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अर्द्धनगरीय दरों के आधार पर बिल जारी किए जाने से उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

खुली बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि यदि संबंधित विभागीय अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर समस्या का उचित समाधान नहीं किया और ग्रामीणों की मांग के अनुरूप पेयजल बिल निर्धारित नहीं किए, तो गठित कोर कमेटी आंदोलन को आगे बढ़ाएगी। आवश्यकता पड़ने पर मामले को न्यायालय में ले जाने का निर्णय भी लिया गया।

बैठक में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो ग्राम सभा रायवाला के ग्रामीण विधानसभा चुनाव के बहिष्कार जैसे कठोर निर्णय पर विचार करने को बाध्य होंगे।

ग्रामीणों ने जल संस्थान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक रायवाला ग्राम सभा को अर्द्धनगरीय पेयजल योजना से बाहर नहीं किया जाता, तब तक ग्रामीण पानी के बिल जमा नहीं करेंगे। बैठक में आवश्यकता पड़ने पर ग्राम सभा रायवाला स्थित विभागीय नलकूप में तालाबंदी किए जाने की चेतावनी भी दी गई।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि उचित पेयजल व्यवस्था, ग्रामीण क्षेत्र के अनुरूप दरों और अपने अधिकारों की मांग को लेकर है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित