नैनीताल , अप्रैल 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 1998 में उधमसिंहनगर जिले के किच्छा क्षेत्र में हुई डकैती के बहुचर्चित मामले में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए रजमत खान उर्फ पप्पू, इसरत और कमरुद्दीन समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है।
मामले के अनुसार, 22 मई 1998 की देर रात किच्छा क्षेत्र में प्रदीप कुमार और कैलाश के घर में आठ से नौ लोगों ने घुसकर हमला किया, परिवार को बंधक बनाया और सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए। घटना में एक महिला को भी चोटें आई थीं। इस प्रकरण में निचली अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती) और 412 के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक उसका दोष संदेह से परे सिद्ध न हो जाए। अदालत ने पाया कि पहचान परेड, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों में कई विसंगतियां हैं, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो जाता है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत द्वारा साक्ष्यों का मूल्यांकन अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। ऐसे में संदेह का लाभ आरोपियों को दिया जाना चाहिए।
इन्हीं आधारों पर उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के निर्णय को रद्द करते हुए सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
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