भुवनेश्वर , जुलाई 16 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने एली एनिमेशन प्राइवेट लिमिटेड की एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के रिलीज करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने व्यवस्था दी है कि जारी रथ यात्रा उत्सव के दौरान इसे रिलीज करने से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है और भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमन की खंडपीठ ने एक आदेश में निर्देश दिया है कि अदालत की अनुमति के बिना या सुनवाई की अगली तारीख तक, जो भी पहले हो, फिल्म को 17 जुलाई या उसके बाद रिलीज नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई पांच अगस्त को तय की गयी है।
यह अंतरिम आदेश महेश कुमार साहू और अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर आया है, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा फिल्म को दिए गए प्रमाणन को रद्द करने और ओडिशा में इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गयी थी।याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ से जुड़े काल्पनिक बचपन के प्रसंगों, कारनामों और युद्ध के दृश्यों को दिखाया गया है, जो स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, मंदिर की परंपराओं और लंबे समय से चली आ रही धार्मिक प्रथाओं के खिलाफ हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि देवता को एक काल्पनिक तरीके से बोलते और व्यवहार करते हुए दिखाना भक्तों के लिए आपत्तिजनक है और इससे गहरी धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचने की संभावना है। फिल्म का टीज़र छह जून को रिलीज होने के बाद, भक्तों, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और अन्य लोगों द्वारा व्यापक आपत्तियां उठायी गयी थीं, जिसके बाद निर्माता को पुरी के गजपति महाराज और मंदिर अधिकारियों के सामने एक विशेष स्क्रीनिंग रखनी पड़ी थी। स्क्रीनिंग के दौरान कई आपत्तियां उठायी गयीं और निर्माता ने कथित तौर पर उचित बदलाव करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, निर्माता ने बाद में सुझावों के अनुसार बदलाव किए बिना ही 17 जुलाई को इसे रिलीज करने की घोषणा कर दी।
निर्माता ने तर्क दिया कि फिल्म में एक डिस्क्लेमर दिया गया था कि यह एक काल्पनिक रचना है। उन्होंने अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश के बावजूद अंतिम समय में जनहित याचिका दायर की गयी है।
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