नयी दिल्ली , जुलाई 15 -- पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक की आपूर्ति में आयी रूकावट के मद्देनजर सरकार ने इस क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति 2026 को मंजूरी दी है जिसमें देश भर में नये यूरिया संयंत्र लगाये जायेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई आर्थिक मामलों की केन्द्रीय मंत्रिमंडल की समिति ने उर्वरक विभाग के इस आशय के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी।

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बाद में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस नीति के अमल में आने के बाद देश उर्वरक के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढेगा। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत नये संयंत्र लगाने के लिए सरकारी , सहकारी और निजी तीनों क्षेत्रों से प्रस्ताव मिले हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि अभी देश में चार करोड़ टन यूरिया की खपत होती है जिसमें से एक करोड टन का आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि नयी नीति के पूरी तरह अमल में आने के बाद यूरिया आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नयी नीति देश भर में गैस-आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देगी। इससे आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। नयी नीति में 2012 की निवेश नीति की तुलना में तीन प्रमुख बदलाव किये गये हैं। पहले बदलाव में ज़्यादा पारदर्शिता के लिए स्थिर और अचल लागतों को अलग करना, दूसरा 12 प्रतिशत की न्यूनतम और 16 प्रतिशत की अधिकतम सीमा के साथ 'रिटर्न ऑन इक्विटी' का एक व्यावहारिक बैंड शुरू करना और तीसरा मौजूदा विनिमय दर के आधार पर चार वर्ष बाद स्थिर लागत को भारतीय मुद्रा में बदलकर विदेशी मुद्रा जोखिम को कम करना है। अनुमान है कि इन उपायों से 2012 की निवेश नीति की तुलना में 2026 की राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति के तहत स्थापित प्रत्येक प्लांट के लिए 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। यूरिया निवेश नीति के अंतर्गत ही नये संयंत्रों की स्थापना की जाएगी।

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