नयी दिल्ली , जुलाई 09 -- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरूवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में उच्च समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए अधिकार पत्र जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा गहरे समुद्र में मत्स्य पालन मिशन दस्तावेज का भी विमोचन किया और देश भर के 10 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों और मछुआरों को उच्च समुद्र में मछली पकड़ने के अधिकार पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारतीय मछुआरों को देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र और उच्च समुद्र की विशाल क्षमता का स्थायी रूप से दोहन करने में सक्षम बनाकर भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम मत्स्य पालन क्षेत्र में विकास, निरंतरता और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत करने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछुआरा समुदायों के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र है, यह ऐसी विशाल समुद्री संपदा है जिसका बड़े पैमाने पर दोहन हो सकता है। उन्होंने कहा कि जहां पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने की गतिविधियां तट के करीब रही हैं, वहीं नया ढांचा भारतीय मछुआरों को टूना जैसी महंगी बिकने वाली प्रजातियों के सतत दोहन के लिए गहरे पानी में आत्मविश्वास से उतरने में सक्षम बनाएगा।
मत्स्य पालन क्षेत्र के तेजी से विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। यह वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग आठ प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मछली पालक किसानों की आजीविका का समर्थन करता है और पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान समुद्री खाद्य निर्यात 73,000 करोड़ रुपये को पार कर गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उच्च समुद्र पहल भारत की निर्यात क्षमता को और मजबूत करेगी तथा कटाई, प्रसंस्करण, शीत श्रृंखला, परिवहन, पैकेजिंग, रसद और निर्यात सेवाओं में रोजगार पैदा करेगी।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि नया ढांचा अधिकार पत्र जारी करने के लिए मत्स्य पालन सहकारी समितियों, मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों और मछुआरों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने इस पहल को तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और इस बात पर जोर दिया कि सामूहिक प्रयास मत्स्य पालन क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव ला सकते हैं।
सतत तरीके से मछली पकड़ने को एक नैतिक जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति समुद्री संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ चलनी चाहिए। उन्होंने अवैध और अनियमित मछली पकड़ने के खिलाफ उपायों को महत्व देते हुए अपनाना होगा।
उपराष्ट्रपति ने मत्स्य पालन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक अवसरों से संचालित एक आधुनिक पेशे के रूप में देखने का आग्रह करते हुए उन्होंने संस्थानों से विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए ज्ञान, प्रौद्योगिकी और वित्त के साथ मछुआरा समुदायों का समर्थन जारी रखने का आह्वान किया।
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