लखनऊ , सितंबर 25 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित 4,030 आंबेडकर प्रतिमा स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए 403 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। योजना के प्रथम चरण में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10-10 प्रतिमा स्थलों का विकास कराया जाएगा। इन कार्यों को 31 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

शासन के अनुसार योजना का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित आंबेडकर और अन्य महान विभूतियों की प्रतिमाओं को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है। अनेक प्रतिमा स्थल छत, बाउंड्री वॉल जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं। योजना के तहत ऐसे स्थलों का संरक्षण करने के साथ आसपास के क्षेत्र का भी विकास और सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।

चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 40,300 लाख रुपये यानी 403 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शासन के सितंबर 2026 के पत्र के बाद 22 सितंबर को निदेशालय स्तर से प्रदेश की 403 विधानसभाओं में स्थापित 4,030 प्रतिमा स्थलों के विकास के लिए यह धनराशि जिलाधिकारियों के निवर्तन पर आवंटित की गई।

इस हिसाब से प्रत्येक प्रतिमा स्थल के लिए औसतन 10 लाख रुपये उपलब्ध होंगे। हालांकि शासनादेश में एक मूर्ति स्थल के विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है और वास्तविक व्यय स्थल की आवश्यकता के अनुसार तय किया जाएगा।

योजना के तहत प्रतिमा स्थलों पर रैलिंगयुक्त स्टील की सीढ़ी, प्रतिमा की छत, बाउंड्री, फिनिशिंग, हरियाली और प्रकाश व्यवस्था सहित आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। प्रतिमा के नाम और उसके इतिहास की संक्षिप्त जानकारी वाला तीन गुणा 2.5 फीट का सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसे जिलाधिकारी अनुमोदित करेंगे। योजना में पुरानी अथवा क्षतिग्रस्त प्रतिमा के स्थान पर आवश्यकतानुसार संगमरमर की नई प्रतिमा स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है।

योजना के क्रियान्वयन और विभागों के बीच समन्वय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी गठित की गई है। इसमें न्याय, संस्कृति, पर्यटन, वित्त, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास और समाज कल्याण सहित संबंधित विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतरविभागीय समन्वय समिति गठित की गई है। इसके माध्यम से योजना की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किया जाएगा।

योजना के तहत प्रतिमा स्थल के विकास के लिए आवेदन खंड विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी अथवा जिलाधिकारी को दिया जा सकेगा। स्थल विकास का आगणन जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्था से तैयार कराया जाएगा। निर्माण और सौंदर्यीकरण के कार्य निर्धारित इंजीनियरिंग एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप कराए जाएंगे। योजना का क्रियान्वयन संबंधित विभाग, नगरीय निकाय, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत अथवा ग्राम पंचायत के माध्यम से किया जा सकेगा। कार्य पूरा होने के बाद प्रतिमा स्थल का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।

शासन ने योजना के लिए समय-सारिणी निर्धारित की है। इसमें प्रस्ताव और आवेदन प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण, आगणन तैयार करने तथा निविदा प्रक्रिया के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है। परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सितंबर में जिलों को धनराशि आवंटित किए जाने के बाद अब जिला स्तर पर कार्यदायी संस्था के चयन, निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों के प्रशासनिक और वित्तीय अनुमोदन तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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