नैनीताल , मई 29 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) कार्मिकों के विनियमितीकरण के मामले में दायर अवमानना याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कार्मिकों को न्यूनतम वेतनमान का भुगतान करें। अदालत ने यह भी कहा कि किसी कार्मिक को सेवा से हटाया नहीं जायेगा।
उपनल कर्मचारी संघ और अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ में सुनवाई हुई। आज सरकार की ओर से कहा गया कि उपनल कार्मिकों को न्यूनतम वेतनमान देने को सरकार तैयार है।
अनुबंध में नई नियुक्ति को लेकर जो शर्तें थी वह हटा दी गई हैं। उपनल कार्मिकों की ओर से अदालत का ध्यान दिलाया गया कि अनुबंध के कालम 07 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि उपनल कार्मिकों को सरकारी कर्मचारियों के समान अन्य कोई लाभ देय नहीं होगा। अदालत ने इसे उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध बताया।
उपनल कार्मिकों की ओर से अदालत को यह भी बताया गया है कि प्रदेश सरकार वर्ष 2017 में देहरादून में सगंध पुष्प केन्द्र के कार्मिकों का विनियमितीकरण वर्ष 2013 की नियमावली के अनुसार कर चुकी है। इसके बाद अदालत ने सरकार को उसी नियमावली के तहत विनियमितीकरण प्रक्रिया लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार की ओर से इस मामले में जवाब पेश करने के लिए समय की मांग की गयी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता एमसी पंत ने बताया कि अदालत ने सरकार को 09 जून तक का समय दिया है। अब इस मामले में 09 जून को ही सुनवाई होगी।
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