भोपाल , अप्रैल 29 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्यानिकी फसलें कम भूमि में अधिक आय का सशक्त माध्यम हैं और प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को इससे जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मसाला फसलों के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जबकि फूल एवं सब्जी उत्पादन में तीसरे तथा फल उत्पादन में चौथे स्थान पर है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि उद्यानिकी फसलों के रकबे का वर्षवार विस्तार किया जाए और किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खाद तथा आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इन फसलों की अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए इनके उत्पादन, ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए "सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर" स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 19 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है और केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उद्यानिकी उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग की प्रक्रिया जारी है, जिसमें जबलपुरी मटर, कुंभराज धनिया, बुरहानपुर केला, रियावन लहसुन, खरगोन मिर्च, मालवी आलू, बरमन भटा और छतरपुर पान जैसे उत्पाद शामिल हैं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश में मखाना की खेती को 14 जिलों में प्रोत्साहित किया जा रहा है और इसका रकबा इस वर्ष 85 हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। साथ ही, विभिन्न जिलों में आम, मिर्च, केला, सब्जी और अमरूद महोत्सव आयोजित किए जाएंगे, जिससे किसानों को बाजार और प्रोत्साहन मिल सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को आधुनिक बीज, सिंचाई सुविधा, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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