ग्वालियर , अक्टूबर 26 -- 21वें आईटीएम उद्भव उत्सव इंटरनेशनल कल्चरल ओलंपियाड के अंतिम दिन एकल और समूह नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से राधा-कृष्ण की रासलीला, हनुमान की रामभक्ति, भगवान शिव के रौद्र स्वरूप और भगवान जगन्नाथ की स्तुति को मंच पर जीवंत किया। शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, भक्ति और पौराणिक प्रसंगों की झलक देखने को मिली।

आईटीएम यूनिवर्सिटी, तुरारी में सुबह आयोजित एकल नृत्य के फाइनल राउंड में विभिन्न शहरों से आए प्रतिभागियों ने अपनी कला और भाव-भंगिमाओं का प्रदर्शन किया। गुरुग्राम की आयशा खट्टर ने फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के गीत 'जब प्यार किया तो डरना क्या' पर प्रस्तुति दी, जबकि ग्वालियर की वाणी पाठक ने 'ठाढ़े रहियो ओ बांके यार' पर नृत्य किया। गुरुग्राम के अर्नव अजाना ने 'डिवाइन पावर' और 'ओम नमः शिवाय' की प्रस्तुति दी। गुवाहाटी की रेनाइस्ता जैन ने राधा-कृष्ण की रासलीला और इंदौर की स्वर्णिम नेमा ने कृष्ण-अर्जुन संवाद को नृत्य-अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया। अन्य प्रतिभागियों ने शिव महिमा, कबीर के भजन और प्रकृति से जुड़े विषयों पर भी प्रस्तुतियां दीं।

शाम को सिथौली स्थित आईटीएम परिसर के खुले मंच 'नाद' पर समूह नृत्य का आयोजन हुआ। कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन के कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ की स्तुति से कार्यक्रम की शुरुआत की। इंदौर के डेली कॉलेज के विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम प्रस्तुत किया, जबकि दिल्ली पब्लिक स्कूल के कलाकारों ने मेघनाद प्रसंग को नृत्य के माध्यम से मंचित किया। सिंधिया कन्या विद्यालय की छात्राओं ने 'नटनम' प्रस्तुत किया। ओपन क्लासिकल डांस श्रेणी में आयाम कथक अकादमी ने शिव वंदना की। इसके अलावा कल्पार्पण डांस एकेडमी, स्वर्णा डांस एकेडमी और ए.के.एस. एकेडमी के कलाकारों ने भी प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और उनकी पत्नी शशि त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. नलिनी-कमलिनी ने की। विशेष अतिथियों में सिंधिया कन्या विद्यालय की प्राचार्य निशि मिश्रा, आईटीएम यूनिवर्सिटी के उपकुलपति योगेश उपाध्याय, उद्भव के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय और सचिव दीपक तोमर शामिल रहे।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि सैनिक और कलाकार दोनों के जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व है। कला की कोई भाषा नहीं होती और संगीत तथा नृत्य भावों के माध्यम से संवाद स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त माध्यम हैं और विभिन्न देशों तथा संस्कृतियों के बीच आपसी समझ को मजबूत करते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों के लिए मॉडल यूनाइटेड नेशंस जैसी गतिविधियों को भी महत्वपूर्ण बताया।

पद्मश्री नलिनी-कमलिनी ने कहा कि कलाकार और सैनिक दोनों कठिन प्रशिक्षण तथा अनुशासन से निखरते हैं। जिस प्रकार पत्थर चोट सहकर मूर्ति का रूप लेता है, उसी तरह गुरु अपने शिष्यों को तराशकर उनकी प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उद्भव के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के 30 वर्ष के सफर और ग्वालियर को म्यूजिक सिटी का दर्जा दिलाने में किए गए प्रयासों की जानकारी दी।

उद्भव उत्सव 2026 के एकल नृत्य वर्ग में विभिन्न आयु समूहों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सेमी-क्लासिकल श्रेणी में भी बच्चों, किशोरों और वयस्क कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का संचालन समीक्षा दुबे और डॉ. मनीषा गिरी ने किया, जबकि प्रवीण शर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। निर्णायक मंडल में कोलकाता की प्रोफेसर देवजानी चटर्जी, अनु मिश्रा, वाणी माधव, बालकृष्ण मरार, धीरज कुमार पांडेय और लावण्या आप्टे शामिल रहे।

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