मुंबई , जुलाई 13 -- केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रशासन पर देश के युवाओं के प्रति "उदासीनता" का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार नीट पेपर लीक के कारण पैदा हुए शैक्षिक संकट का समाधान करने के बजाय "राजनीतिक दलों को गिराने" में अधिक रुचि रखती है।
श्री ठाकरे ने नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर गहरी चिंता व्यक्त की। श्री वांगचुक 15 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। श्री ठाकरे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की आलोचना करते हुए कहा, "अगर कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को संभालने में असमर्थ है और उसकी अक्षमता के कारण करोड़ों युवाओं का भविष्य बर्बाद होता है, तो उसे पद पर क्यों बने रहना चाहिए? शिक्षा मंत्री को बदलने से सरकार का इनकार जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।"श्री ठाकरे ने मौजूदा स्थिति और साल 2018 में गंगा नदी के लिए 115 दिनों के उपवास के दौरान जान गंवाने वाले जीडी अग्रवाल की मृत्यु का जिक्र करते हुए कहा, "ऐसा लगता है कि सरकार श्री वांगचुक और इन छात्रों के दम तोड़ने का इंतजार कर रही है, ताकि वह इस पर ध्यान देने के बारे में सोचे तक।" 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है, ऐसे में श्री ठाकरे ने भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर छात्रों का समर्थन करने की भावुक अपील की।
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