नागपुर , जुलाई 18 -- शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को अयोध्या राम मंदिर न्यास से जुड़ी कथित आर्थिक गड़बड़ियों की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की ।

नागपुर में पार्टी के 'राम रक्षा आंदोलन' को संबोधित करते हुए श्री ठाकरे ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ राम रक्षा स्तोत्र पढ़ने के बारे में नहीं है, बल्कि भगवान राम और करोड़ों भक्तों की आस्था की रक्षा करने के लिए है।

शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की अगुवाई में चले राम जन्मभूमि आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर तो आखिरकार बन गया, लेकिन अब इसे भ्रष्टाचार में शामिल लोगों से बचाने के लिए एक नई लड़ाई जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा, "हमने राम मंदिर के निर्माण के लिए लड़ाई लड़ी थी, न कि इसलिए कि इसे लूटा जाए। आज हम मंदिर और भक्तों की आस्था को बचाने के लिए आंदोलन शुरू करने पर मजबूर हुए हैं।"महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राम रक्षा स्तोत्र पढ़ने की चुनौती दिए जाने पर तंज कसते हुए श्री ठाकरे ने कहा, "राम रक्षा पढ़ना आपका काम हो सकता है, लेकिन भगवान राम की रक्षा करना सच्चे भक्तों का फर्ज है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जो भाजपा भगवान राम के नाम पर सत्ता में आई, उसने उनके आदर्शों को पूरी तरह छोड़ दिया है।

अयोध्या में राम मंदिर के चंदे और ज़मीन की खरीद-बिक्री में कथित गड़बड़ियों की खबरों का हवाला देते हुए श्री ठाकरे ने सवाल किया कि भाजपा मंदिर को लूटने वालों के साथ खड़ी है या इसे बचाने वालों के साथ? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार अब धार्मिक संस्थाओं तक फैल गया है। उन्होंने दावा किया कि केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों में चोरियां हुईं, जबकि उज्जैन और अयोध्या में ज़मीन से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ठाकरे ने सरकार द्वारा गठित की एसआईटी को महज़ एक दिखावा बताया। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच उच्चतम या उच्च न्यायालय के किसी ऐसे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की देखरेख में होनी चाहिए जो अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता के लिए जाने जाते हों।

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल से जबरन हटाए जाने को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ बातचीत करने के बजाय एक आतंकवादी की तरह बर्ताव किया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित करते हुए श्री ठाकरे ने पूछा कि क्या परीक्षाओं के पर्चे लीक होना, छात्रों पर हमले और कथित भ्रष्टाचार जैसे हालात उसी 'हिंदू राष्ट्र' की तस्वीर हैं जिसका सपना संघ ने देखा था? उन्होंने कहा, "हिंदू राष्ट्र को लेकर हमारा नज़रिया राम राज्य और शिवशाही का है, जो गरीबों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं को न्याय देता है, न कि ऐसा तंत्र जो ठेकेदारों या भ्रष्टाचारियों को बचाता है।"साल 1992 में बाबरी मस्जिद के गिराए जाने का जिक्र करते हुए श्री ठाकरे ने दावा किया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने कुर्बानियां दी थीं, लेकिन भाजपा अब राजनैतिक और आर्थिक फायदे के लिए उस विरासत का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने अपने पुराने नारे को दोहराते हुए 'भाजपा-मुक्त राम' की मांग की और कहा कि ये कथित गड़बड़ियां हिंदुओं की आस्था और भावनाओं पर एक बड़ा आघात हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित