उदयपुर , मई 15 -- राजस्थान में उदयपुर में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन-नयी दिल्ली, राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी- जयपुर एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय लोक जत्था कार्यशाला का शुक्रवार को शुभारंभ किया गया।

सुखाड़िया विश्वविद्यालय प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. पी. एस. राजपूत ने शुक्रवार को बताया कि यह आयोजन एचआईवी/एड्स जैसी घातक बीमारीयो के प्रति जागरूकता एवं रक्त दान को लोककलाओं के माध्यम से प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया।

उन्होंने बताया कि बप्पा रावल सभागार में आयोजित इस लोक कला जत्था कार्यशाला में राज्यभर से लोक कलाओं में निपुण 90 से अधिक लोक कलाकारों ने शिरकत की। इसमें ख्याल, कठपुतली, नुक्कड़ नाटक, गायन, जत्था कला, जादू, लोक नृत्य आदि विधाओं के कलाकार सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने की।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता राजस्थान सरकार में स्वास्थ्य सेवा के निदेशक डॉ एस. के. परमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं, जहां अब भी लोक संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए एचआईवी एड्स जैसी घातक बीमारियों की जागरूकता के लिए लोक कला एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अशोक आदित्य ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते कहा कि लोक कलाओं के माध्यम से दी गई जानकारी का प्रभाव गहरा होता है। सरकार द्वारा इस अभियान को लोक कला के माध्यम से संचालित करना एक सराहनीय कदम है।

वर्तमान में देश तेज़ गति से प्रगति पथ पर अग्रसर है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रत्येक नागरिक को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करके एचआईवी/एड्स जैसी बीमारियों से मुक्त भारत का सपना साकार करना चाहिये । इसलिये ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रम अति आवश्यक हैं, जो लोगों को उनकी अपनी भाषा और संस्कृति के माध्यम से सचेत करते हैं और संभावित कठिनाइयों के प्रति सचेत करते हैं।

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