रायपुर , जून 22 -- छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल (भारतीय उड़न गिलहरी) देखे जाने को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वन विभाग ने इसे रिजर्व क्षेत्र में स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया है।

वन विभाग के अनुसार हाल ही में रिजर्व क्षेत्र में वन भ्रमण के दौरान इस दुर्लभ और निशाचर प्रजाति की उपस्थिति दर्ज की गई। भारतीय उड़न गिलहरी मुख्य रूप से घने और प्राकृतिक रूप से सुरक्षित जंगलों में पाई जाती है। इसकी मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जाती है कि संबंधित वन क्षेत्र जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से समृद्ध है।

विभाग का कहना है कि राज्य सरकार के मार्गदर्शन में जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों के संवर्धन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल पक्षियों की तरह उड़ती नहीं है, बल्कि इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद विशेष झिल्ली की सहायता से यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक फिसलते हुए लंबी दूरी तय करती है। यह रात्रिचर जीव दिन में पेड़ों के खोखलों में विश्राम करता है और रात में भोजन की तलाश में सक्रिय होता है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन ने कहा कि उड़न गिलहरी का दिखाई देना रिजर्व में किए जा रहे संरक्षण कार्यों की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और संरक्षण के लिए विभाग लगातार कार्य कर रहा है।

वन विभाग का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति के दस्तावेजीकरण से प्रदेश की जैव विविधता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। साथ ही विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय समुदायों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा इको-पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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