गरियाबंद , अक्टूबर 18 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका वन क्षेत्र में पिछले दस वर्षों के दौरान अतिक्रमण का दायरा चार गुने से अधिक बढ़ गया है। इस अवधि में करीब सवा लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान सामने आया है, जबकि साढ़े तीन हजार से अधिक पेड़ तनों को नुकसान पहुंचाए जाने के कारण सूखने के खतरे का सामना कर रहे हैं। इन पेड़ों को बचाने के लिए कर्नाटक के पर्यावरणविद् एवं 'ट्री डॉक्टर' के नाम से चर्चित विजय निशांत अगले सप्ताह टाइगर रिजर्व का दौरा कर वैज्ञानिक उपचार के लिए तकनीकी मार्गदर्शन देंगे।
उपलब्ध सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, करका क्षेत्र में वर्ष 2016 में लगभग 22 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से प्रभावित थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 102.47 हेक्टेयर हो गई है। डीजीपीएस आधारित ड्रोन सर्वेक्षण और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की पुरानी उपग्रह तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन में पिछले एक दशक के दौरान प्रभावित क्षेत्र में 1.25 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा सर्वेक्षण आधारित आकलन है और प्रत्येक पेड़ की कटाई की अलग-अलग पुष्टि नहीं हुई है।
टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान 3,500 से अधिक पेड़ों में गर्डलिंग के निशान पाए गए हैं। इनमें साल, बीजा और तेंदू सहित विभिन्न प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। गर्डलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पेड़ के तने के चारों ओर छाल की पट्टी हटा दी जाती है। इससे पेड़ के ऊपरी हिस्से में तैयार होने वाले पोषक तत्वों का जड़ों तक पहुंचना बाधित हो सकता है और पेड़ धीरे-धीरे सूखकर नष्ट हो सकता है।
निरीक्षण के दौरान कुछ पेड़ों पर पुराने और कुछ पर हाल में पहुंचाई गई क्षति के संकेत मिले हैं। इससे अतिक्रमण के उद्देश्य से पेड़ों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि, इसके वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस बीच क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वैज्ञानिक उपचार की दिशा में पहल की है। कर्नाटक के पर्यावरणविद् विजय निशांत अगले सप्ताह करका क्षेत्र का दौरा करेंगे। वह प्रभावित पेड़ों की स्थिति का आकलन करने के साथ वन कर्मचारियों को उपचार और निगरानी की तकनीकों के संबंध में मार्गदर्शन देंगे।
विजय निशांत प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन के संस्थापक हैं और वृक्ष संरक्षण, डिजिटल ट्री मैपिंग तथा पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2002 में बेंगलुरु के वन प्रकोष्ठ के अधिकृत स्वयंसेवक के रूप में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों की शुरुआत की थी। वर्ष 2015 में कर्नाटक की पहली ट्री कमेटी के गठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
इससे पहले टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वर्ष 2022 में तौरेंगा वन परिक्षेत्र में गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रयोग किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस प्रयास में सफलता की दर लगभग दस प्रतिशत रही थी। अब विशेषज्ञों की सहायता से क्षति की गंभीरता का आकलन कर उपयुक्त उपचार तकनीक अपनाने की तैयारी है।
टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार, मैदानी अमले में लगभग 65 प्रतिशत पद रिक्त होने के बावजूद पिछले चार वर्षों में एक हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इस दौरान वन सुरक्षा दल पर पांच घातक हमले होने की जानकारी भी सामने आई है।
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