नयी दिल्ली , जुलाई 21 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तर मैसेडोनिया को स्थिर, बहुध्रुवीय और समृद्ध वैश्विक भविष्य की संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया तथा द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने की भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी।

सुश्री मुर्मु ने मंगलवार को उत्तर मैसेडोनिया की राष्ट्रपति गोरदाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा की उपस्थिति में वहां की संसद (असेंबली) को संबोधित करते हुए साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने संसदीय कूटनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए भारत एवं उत्तर मैसेडोनिया के सांसदों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि संस्थागत विश्वास को मजबूत किया जा सके तथा संसदीय कार्यप्रणाली और सार्वजनिक नीति निर्माण में श्रेष्ठ अनुभवों का आदान-प्रदान हो सके।

उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को विकास और नवाचार के एक उभरते क्षेत्र के रूप में देखता है, जिसमें उत्तर मैसेडोनिया भूमध्यसागर, मध्य यूरोप तथा पूर्व और पश्चिम के बीच एक महत्वपूर्ण प्रवेशद्वार की भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि भारत व्यापार और निवेश के अवसरों सहित द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

वसुधैव कुटुम्बकम् के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए सुश्री मुर्मु ने कहा कि कोई भी राष्ट्र अलग-थलग रहकर समृद्ध नहीं हो सकता और देशों को दीवारें नहीं, बल्कि पुल बनाने चाहिए। उन्होंने भारत और उत्तर मैसेडोनिया से शांति तथा समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतिभाई बंभानिया तथा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा और विजय बघेल भी उपस्थित थे।

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