पटना , जुलाई 25 -- िहार के ग्रामीण अंचलों विशेषकर बाढ़ और बारिश से सर्वाधिक प्रभावित रहने वाले उत्तर बिहार में सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। राज्य योजना (नाबार्ड) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कों और सुदृढ़ पुलों का जाल बिछाया गया है, जिससे बरसात के मौसम में भी आम जनजीवन और आवागमन पूरी तरह से सुगम और निर्बाध हो गया है।
उत्तर बिहार के जिलों में नदियों की बहुलता के कारण मानसून के दौरान आवागमन की भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन विभाग द्वारा कराए गए पुलों और पक्की सड़कों के निर्माण से इस क्षेत्र में आवागमन सुलभ हो गया है। इस दिशा में तिरहुत और मिथिलांचल के क्षेत्रों में शानदार प्रगति दर्ज की गई है। मधुबनी जिले में 314 किलोमीटर लंबी सड़कों और 56 पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वहीं दरभंगा जिले में 236 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण कर संपर्कता सुनिश्चित की गई है तथा जलजमाव वाले क्षेत्रों में 58 पुलों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा समस्तीपुर जिले में भी 130 किलोमीटर लंबी सड़कें तथा 58 पुलों का निर्माण किया गया है, जिससे यातायात सुगम हुआ है। साथ ही मुजफ्फरपुर जिले में भी 141 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों तथा 23 पुलों का निर्माण सुनिश्चित किया गया है।
उत्तर बिहार के चंपारण और सारण प्रमंडल के जिलों में भी राज्य योजना (नाबार्ड) के तहत उल्लेखनीय कार्य किया गया है, जिससे बरसात के दिनों में भी इन क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालयों से निर्बाध बना हुआ है। इस दिशा में पूर्वी चंपारण जिले में 232 किलोमीटर पक्की सड़कें और 51 पुल, पश्चिमी चंपारण जिले में 59 किलोमीटर सड़कें तथा 44 पुल और सीतामढ़ी जिले में भी 158 किलोमीटर सड़कें तथा 44 पुल बनाए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त गोपालगंज जिले में 71 किलोमीटर सड़कें और 18 पुल, सीवान में 87 किलोमीटर सड़कें और 7 पुल तथा सारण जिले में 121 किलोमीटर पक्की सड़कें और 20 पुल तैयार किए जा चुके हैं।
उत्तर बिहार में राज्य योजना (नाबार्ड) के तहत हो रहे इन कार्यों से स्थानीय ग्रामीण जनजीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव आ रहा है। इन बारहमासी पक्की सड़कों और पुलों के सुदृढ़ नेटवर्क के कारण आमजनों का आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हुआ है।
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