पटना , मई 01 -- त्तर बिहार का वह क्षेत्र जो हर वर्ष कोसी, गंडक, बागमती और कमला जैसी सदानीरा नदियों के उफान के कारण बाढ़ की गंभीर विभीषिका झेलता रहा है, वहां अब ग्रामीण कार्य विभाग के प्रयासों से बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।
दशकों से बरसात के दिनों में टापू बन जाने वाले गाँवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नाबार्ड योजना के तहत नदियों पर ग्रामीण पुलों का जाल बिछाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में पुल निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इस दिशा में पूर्वी चंपारण जिले में सर्वाधिक 50 ग्रामीण पुलों का निर्माण किया जा चुका है। वहीं बाढ़ की मार झेलने वाले दरभंगा जिले में यातायात को सुगम और बाधारहित बनाने के लिए 74 पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 54 ग्रामीण पुल बनकर तैयार हो चुके हैं। भौगोलिक दृष्टिकोण से संवेदनशील सीतामढ़ी जिले में 44 पुलों और मधुबनी जिले में 55 पुलों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, समस्तीपुर जिले में भी 58 पुलों का निर्माण कर संपर्कता सुदृढ़ की गई है, ताकि कोई भी गाँव संपर्कता से वंचित न रहे।
ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से नाबार्ड के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बारहमासी संपर्कता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। पूर्व में इन इलाकों में हल्की सी बारिश या नदियों का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन का एकमात्र सहारा छोटी और असुरक्षित नावें हुआ करती थीं। बाढ़ के दौरान इन ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट जाता था। परंतु अब नाबार्ड योजना के तहत निर्मित इन पुलों से व्यापक परिवर्तन आया है। इन पुलों के निर्माण से उत्तर बिहार के सुदूर गाँवों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्राप्त हुई है, जिससे इन गांवों के विकास की रफ्तार भी तेज हुई है।
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