लखनऊ , जून 29 -- उत्तर प्रदेश सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर इनकी पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक प्रदेश के 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अधिसूचित किया जा चुका है, जबकि 36 जिलों से 44 नयी आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव सरकार को प्राप्त मिले हैं।
जिन आर्द्रभूमियों को अधिसूचित किया जा चुका है, वे कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिलों में हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नयी आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं।
सरकार के अनुसार आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है।
सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
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