लखनऊ , जुलाई 14 -- उत्तर प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) ने राज्य में महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से एफएलएफपी (फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन) सेल के गठन की दिशा में मंगलवार को अंतर-विभागीय बैठक आयोजित की।
बैठक में विभिन्न विभागों, उद्योग जगत और विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एसटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्ष 2017-18 में प्रदेश में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर 13.5 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 32.4 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने कहा कि 'विकसित उत्तर प्रदेश @2047' के लक्ष्य के अनुरूप इसे 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए एफएलएफपी सेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद में महिलाओं का योगदान करीब 18 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 37 प्रतिशत है। इस अंतर को कम करने के लिए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है।
यह पहल नौ जून 2026 को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और आईपीई ग्लोबल लिमिटेड के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हिस्सा है। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक राज्य की युवतियों और महिलाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक अवसरों का विस्तार करना है।
बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित एफएलएफपी सेल 12 विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा तथा महिला रोजगार से जुड़ी योजनाओं की निगरानी, तिमाही समीक्षा और कार्ययोजना के क्रियान्वयन का दायित्व निभाएगा।
इसके प्रमुख कार्यों में कौशल विकास, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना, महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास एवं परिवहन सुविधाओं को मजबूत करना तथा डेटा आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करना शामिल है। बैठक में सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में महिलाओं का नामांकन बढ़ाने, महिला रोजगार सुविधा तंत्र विकसित करने, कार्यरत महिलाओं के लिए छात्रावासों का विस्तार, औद्योगिक क्षेत्रों में महिला रोजगार बढ़ाने और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
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