(विद्या शंकर राय)लखनऊ , जुलाई 01 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई में अल्पसंख्यक मोर्चे के गठन में देर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस समय गहन चर्चा का विषय बन गयी है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस बारे में पिछले दिनों केवल इतना कहा कि 'यह पार्टी का अपना मामला है इसकी चिंता पार्टी पर छोड़ दीजिए।' पर पार्टी सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक मोर्चे के गठन को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है और इसका गठन विधानसभा चुनाव तक गठन लटक सकता है जो अगले साल के शरु में होने।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोर्चे के अध्यक्ष पद को लेकर कई नामों पर मंथन चल रहा है। पुराने चेहरों बनाम नए चेहरों को लेकर खींचतान है। कुछ नेता चाहते हैं कि मोर्चे का गठन आगामी विधान सभा चुनाव के ठीक पहले किया जाए ताकि इसके जरिये लोगों में एक सही राजनीतिक संदेश भेजा जा सके। वहीं कई कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के जल्द गठन की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं तकि जमीनी स्तर पर सक्रियता और समन्वय बना रहे।

भाजपा ने प्रदेश में मुस्लिम समाज को अपने साथ जोड़ने के लिए अभियान चला रखा है, जिसमें पसमांदा मुस्लिम समाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि सरकार की योजनाओं में मुस्लिम हो या कोई अन्य समाज, किसी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा है।

प्रदेश की योगी सरकार ने दरअसल पसमांदा समाज को आगे बढ़ाने लिए मुस्लिम चेहरों को आगे लाने की रणनीति के तहत ही दानिश आजाद अंसारी को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का राज्य मंत्री बनाया। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जैसे पद भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं। पार्टी ने एएमयू के पूर्व कुलपति तारिक मंसूर को भी जोड़ा।

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