देहरादून , अक्तूबर 18 -- उत्तराखंड के देहरादून स्थित मॉडल कॉलोनी, आराघर के उत्तरायण कालीबाड़ी मंदिर में दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को महाष्टमी के अवसर पर संधि पूजा एवं अष्टमी पूजन का समापन विधि-विधान के साथ हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ भाग लिया।
मंदिर के संयोजक अधीर मुखर्जी ने बताया कि संधि पूजा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पूजा महाष्टमी और महानवमी के संधिकाल में की जाती है। इस दौरान 108 कमल के पुष्पों और 108 दीपों से मां दुर्गा की आराधना की गई। उन्होंने बताया कि संधि पूजा के 50 मिनट अत्यंत विशेष माने जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन समय में मां दुर्गा मंडप में विशेष रूप से विराजमान रहती हैं। उन्होंने बताया कि प्राचीन परंपरा में पशु बलि की प्रथा प्रचलित थी, जिसे बाद में प्रतीकात्मक बलि की परंपरा से बदल दिया गया। इसके स्थान पर चाल कुम्हड़ा (कुम्हड़ा), गन्ना और मावा जैसी वस्तुओं का प्रयोग किया जाने लगा, जिससे धार्मिक परंपरा को अहिंसक स्वरूप प्रदान किया गया।
पूजा के अवसर पर महिलाओं ने लाल किनारी वाली सफेद साड़ियां धारण कीं और व्रत रखकर मां दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित की। मंदिर में पूजा की तैयारियों के लिए महिलाएं सुबह 5 बजे ही पहुंच गई थीं और पूरे समर्पण के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था में जुट गईं।
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