नैनीताल , मई 13 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय हल्द्वानी में कथित रूप से रेलवे, नजूल और वन भूमि को भू-माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से मामूली रुपए के स्टाम्प पर बेच जाने के मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में बुधवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता हितेश पांडे की ओर से शीघ्र सुनवाई के लिए आज प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अभी तक इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि आज भी सौ और पांच सौ रुपये के स्टाम्प पेपर पर नजूल, वन और रेलवे की भूमि बेची जा रही है। इस पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि रेलवे भूमि पर अतिक्रमण से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वर्तमान मामला अलग प्रकृति का है।
दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि हल्द्वानी की गफूर बस्ती में रेलवे भूमि तथा गौलापार-गोजाजाली क्षेत्र में वन विभाग और राजस्व विभाग की भूमि को भू-माफियाओं द्वारा सौ और पांच सौ रुपये के स्टाम्प पर बेचा गया है।
जिन लोगों को यह भूमि बेची गई, वे उत्तराखंड के स्थायी निवासी नहीं है। ये लोग रोजगार की तलाश में यहां आए थे। बाद में उनके वोटर आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज बन गए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जब इस संबंध में प्रशासन और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई तो उन्हें भू-माफियाओं की ओर से जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार इन लोगों पर बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जिससे स्थायी निवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और वे कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराने तथा संबंधित लोगों के सभी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
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