नैनीताल , सितंबर 23 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद राज्य पुलिस महकमे द्वारा दर्ज मुकदमों की जानकारी से जुड़े सार्वजनिक पोर्टल को बंद किए जाने के मामले में पुलिस के जवाब से संतोष जताते हुए जनहित याचिका का पूरी तरह से निस्तारित कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हरिद्वार की नेशनल पब्लिक ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं निवेदिता कुकरेती और पुलिस विभाग की तकनीकी टीम बुधवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुई। पुलिस महकमा की ओर से कहा गया कि प्रदेश पुलिस महकमा की ओर से वेबसाइट को बंद नहीं किया गया है।

प्राथमिकी की जानकारी 'सिटीजन' और 'देवभूमि' एप के माध्यम से ली सकती है। प्राथमिकी देखने के लिए कम लोगों को देवभूमि एप डाउनलोड करना होगा और पंजीकरण करना होगा। अंत में सेल्फी के साथ अपलोड करना होगा। इसके बाद ही प्राथमिकी देखी और अपलोड की जा सकती है। तकनीकी टीम की ओर से अदालत में इसका लाइव डेमो भी दिया गया।

पुलिस अधिकारियों की ओर से अदालत के समक्ष हर महीने का डाटा भी उपलब्ध कराया गया। कहा गया कि पिछले महीने लगभग 1000 प्राथमिकी लोगों ने अपलोड की है। इस महीने 70 प्राथमिकी अभी तक अपलोड की जा चुकी है।

आगे कहा गया कि कुछ लोग इसका दुरुपयोग भी कर रहे हैं। एक-एक आदमी कई कई प्राथमिकी डाउनलोड कर रहा है।

मोबाइल पर भी आम आदमी इसका लाभ उठा सकता है।

इसके बाद अदालत ने पुलिस महकमे के जवाब से संतुष्टि जताते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया था किशीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं किया जा रहा। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि यदि पोर्टल जल्द सुचारू रूप से शुरू नहीं हुआ तो अगली सुनवाई में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होंगे।

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