देहरादून , अप्रैल 05 -- उत्तराखंड में जिला बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि प्रदेश में 11 और नए जिलों का गठन होना चाहिए।

श्री डबराल ने रविवार को यहां उत्तरांचल प्रेस क्लब में रविवार को पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य में विकास की गति को बेहतर बनाने के लिए, राज्य से पलायन रोकने हेतु व बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किए जाने के लिए ग्यारह और नए जिले बनने बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों को नए जिलों के रूप में गठित करने की मांग उठाते हुए कहा कि राज्य में नए जिले न बनने के कारण ढेर सारी समस्याएं खड़ी हो गई है।

उन्होंने कहा कि इन्हीं समस्याओं का समाधान करने के लिए ही ग्यारह और नए जिले बने चाहिए और सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा । उन्होंने कहा कि इसके लिए एक अभियान तेजी के साथ चलाया जाएगा।

समिति के अनुसार राज्य के कई दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आज भी विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्रशासनिक दूरी और संसाधनों के असमान वितरण के कारण आम जनता को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

समिति का कहना है कि यदि नए जिलों का गठन किया जाता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी सुविधाएं भी आम जनता तक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नए जिलों में उत्तरकाशी से पुरोला, नौगांव, मोरी क्षेत्र, टिहरी से नरेंद्र नगर, प्रतापनगर; पौड़ी से कोटद्वार बीरोंखाल; चमोली जनपद से गैरसैंण, नैनीताल से हल्द्वानी,रामनगर के साथ ही हरिद्वार से रुड़की, देहरादून ज़िले से विकासनगर,चकराता, अल्मोड़ा से रानीखेत, पिथौरागढ़ से डीडीहाट तथा उधमसिंहनगर से काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र शामिल हैं।

श्री डबराल ने यह भी कहा कि नए जिलों के गठन से युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और आपदा जैसी परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किए जा सकेंगे।

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