देहरादून , जुलाई 16 -- उत्तराखंड के देहरादून जनपद पुलिस ने गुरुवार को एक ऐसे नटवर लाल को गिरफ्तार किया है, जो खुद को कभी आइपीएस, कभी सैन्य अफसर, रॉ एजेंट, सीआरपीएफ व अन्य एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था। अभियुक्त से कई एजेंसियों का फर्जी विजिटिंग कार्ड, आईडी व यूनिफॉर्म भी बरामद की गई है। अभियुक्त उत्तराखंड कैडर के एक सेवानिवृत उच्च अधिकारी का पुत्र है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रवेंद्र डोभाल ने बताया कि आठ जुलाई को पीड़ित अंशुल उपाध्याय निवासी डाकरा बाजार, थाना कैंट, देहरादून ने थाना राजपुर पर तहरीर दी कि यशोवर्धन नाम के व्यक्ति द्वारा अपने आप को वरिष्ठ अधिकारी बताकर उनकी दिवंगत माता की स्मृति में एक कंपनी का पंजीकरण जल्द कराने के एवज में 15 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई। तहरीर के आधार पर धारा 318 (4) बीएनएस में अभियोग पंजीकृत किया गया। विवेचना में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर अभियोग में धारा 336(3)/338/340(2) की बढ़ोतरी की गई। उन्होंने बताया कि इस बीच 15 जुलाई को एक अन्य पीड़िता डॉ० अनुषा निवासी सोशल स्टेज हॉस्टल कैनाल रोड देहरादून ने भी थाना राजपुर पर तहरीर दी गई। जिसमें यशोवर्धन नाम के व्यक्ति द्वारा खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए अपने प्रभाव में लेकर रक्षा मंत्रालय में डाटा साइंस कंसलटेंट के पद पर नौकरी दिलाने के एवज में धोखाधड़ी कर 4,60,000 रुपए हड़प लिए। उन्होंने बताया कि इस तहरीर पर भी थाना राजपुर पर धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस में अभियोग पंजीकृत किया गया।
श्री डोभाल ने बताया कि इन प्रकरणों के सामने आने पर अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए दिए गए निर्देशों पर एक टीम का गठन किया गया। जिसने दोनों अभियोगों में साक्ष्य संकलन करते हुए दोनो घटना स्थलों का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारियां एकत्र की जिनके आधार पर अभियुक्त यशोवर्धन पुत्र एस० रामास्वामी निवासी मकान नंबर पांच, ऑफीसर्स रेजिडेंशियल कॉलोनी, आईएचएम कैंपस, गढी कैंट, थाना कैंट, देहरादून, आयु 35 वर्ष को सीएसआई तिराहा मसूरी रोड से गिरफ्तार किया गया है।
एसएसपी ने अभियुक्त से पूछताछ के आधार पर बताया कि उसके पिता वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी है। बचपन से उसका सपना अधिकारी बनने का था। बचपन से अपने पिता के साथ रहने के दौरान उसने वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने वाली पावर व सुविधा देखी थी। उसके मन में बचपन से ही वरिष्ठ अधिकारी बनने का सपना था। उसने कई सालों तक यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की किंतु वह सफल नहीं हो पाया। असफलता हाथ लगने पर उसने खुद को फर्जी आईपीएस व अन्य एजेंनसीयों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों पर अपना रौब झाड़ने लगा।
आमजन व भोले भाले लोगों को वह अपने पद का प्रभाव डालकर उनको नौकरी दिलवाने अथवा उनके टेंडर व अन्य काम जल्दी करवाने के नाम पर लाखों रुपए की जालसाजी व धोखाधड़ी करने लगा। उसके बात करने का तरीका तथा उसकी यूनिफॉर्म व फर्जी आई कार्ड देखकर लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लेते थे। इसी का फायदा उठाकर वह सालों से कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है।
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